उज्जैन नगरी में आज रात्रि में हरिहर मिलन... शिव सौंपा भगवान विष्णु को पृथ्वी का भार




भारत सागर न्यूज/उज्जैन/संजय शर्मा । एम की धार्मिक नगरी उज्जैन में बाबा महाकाल के उज्जैन में सत्ता हस्तांतरण हुआ जहां बैकुंड चतुदशी रात 11 बजे भगवान महाकाल की सवारी निकाली गई, जो गोपाल मंदिर पहुंची यहां भगवान महाकाल सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौंपा. यह परंपरा हरि-हर की माला बदलकर निभाई जाती है । 




बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में  आज की आधी रात को सुंदर नजारा देखने को मिला जहा हजारों श्रद्धालु इस नजारे के साक्षी बनें  उज्जैन में बैकुंठ चतुर्दशी पर सृष्टि की सत्ता हस्तांतरण का अद्भुत नजारा  रात्रि मे 11 बजे भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाएगी, जो गोपाल मंदिर पहुंची यहां भगवान महाकाल सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौंपा यह परंपरा हरि-हर की माला बदलकर निभाई जाएगी। 




इसे हरि-हर मिलन भी कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु राजा बलि के यहां पाताल लोक में विश्राम करने जाते हैं. इसलिए चार महीने तक संपूर्ण सृष्टि के पालन का भार भगवान शिव के पास होता है।




हरि-हर मिलन -

गोपाल मंदिर के पुजारी ने बताया कि बाबा महाकाल की सवारी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी भगवान विष्णु (हरि) और शिवजी (हर) के मिलन का प्रतीक है. महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से रात 11 बजे निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी, 




महाकाल चौराहा, गुदरी बाजार, पटनी बाजार होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची सवारी में ढोल-नगाड़ों के साथ आतिशबाजी की गई कई जगह स्वागत हुआ. गोपाल मंदिर पहुंचने पर सवारी मंदिर के अंदर लाई जाएगी. यहां भगवान शिव, विष्णु जी के सामने आसीन हुए।




फिर महादेव जाएंगे तपस्या में -

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर पद्धति से द्वारिकाधीश का पूजन करेंगे। शिवजी के प्रिय बिल्वपत्र और आंकड़े की माला भगवान विष्णु को अर्पित करेंगे। इसके बाद भगवान महाकाल का पूजन कर उन्हें विष्णु जी की प्रिय तुलसीदल की माला अर्पित करेंगे। 




दोनों की प्रिय वस्तुओं का एक-दूसरे को भोग लगाया जाता है। इसके बाद भगवान शिव चार महीने के लिए हिमालय पर्वत पर तपस्या करने चले जाते हैं। यह परंपरा वैष्णव और शैव के समन्वय के साथ-साथ सौहार्द का प्रतीक है ।

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