भूमि विवाद में नया मोड़: सर्वे 656/1/2 की जमीन पर भुगतान और कब्जे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने




भारत सागर न्यूज/संजय शर्मा/नागदा। नागदा क्षेत्र में सर्वे क्रमांक 656/1/2 की भूमि को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। यह भूमि सरणजीत सिंह सलूजा द्वारा प्रीती अरोरा पति अजय अरोरा, निवासी झाबुआ एवं जुगल किशोर अरोरा पिता ओमप्रकाश अरोरा, निवासी नागदा को बेची गई बताई जा रही है। भूमि का आकार 45 फीट × 165 फीट बताया गया है।




विक्रेता सरणजीत सिंह सलूजा का आरोप है कि उन्हें भूमि की पूरी राशि प्राप्त नहीं हुई है तथा खरीदार पक्ष द्वारा गलत स्थान पर कब्जा किया जा रहा है। दूसरी ओर खरीदार पक्ष—प्रीती अरोरा और जुगल किशोर अरोरा—ने स्पष्ट कहा है कि संपूर्ण राशि का भुगतान किए जाने के बाद ही विधिवत रजिस्ट्री संपन्न हुई है और किसी प्रकार की कोई बकाया राशि शेष नहीं है।




पटवारी ने किया मौके का निरीक्षण, पंचनामा तैयार -

विवाद के बाद पटवारी द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया गया और पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। खरीदार पक्ष का कहना है कि रजिस्ट्री के अनुसार उन्हें वैध कब्जा प्राप्त है। उन्होंने यह भी बताया कि भूमि पर सीमेंट के पोल लगाए गए हैं तथा गेट का निर्माण किया गया है, जिसे पूर्व में राजस्व अधिकारी एवं पटवारी द्वारा नाप-जोख के दौरान देखा जा चुका है और उस समय भी पंचनामा बनाया गया था।

नामांतरण एवं खसरा नकल में दर्ज नाम -

खरीदारों का दावा है कि रजिस्ट्री के बाद तहसील कार्यालय में नामांतरण की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और खसरा नकल में भी उनके नाम दर्ज हैं। उनका कहना है कि वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण होने और मौके पर कब्जा होने के बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है।
प्रीती अरोरा और जुगल किशोर अरोरा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) को आवेदन दिया है तथा नागदा थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है, किंतु अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा उनके विरुद्ध अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग -

दोनों पक्षों के दावों के बीच यह मामला अब राजस्व एवं प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि निष्पक्ष जांच और स्पष्ट सीमांकन से ही विवाद का समाधान संभव है। फिलहाल, प्रशासनिक कार्रवाई और राजस्व विभाग की अगली प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई

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