कुलदेवी मंदिर के शासकीय मार्ग पर अतिक्रमण, 10 फीट रास्ता चिन्हित करने की मांग
भारत सागर न्यूज/देवास। जिले की टोंकखुर्द तहसील अंतर्गत ग्राम जिरवाय में स्थित गुनाया परिवार के कुलदेवी–देवताओं के प्राचीन मंदिर तक जाने वाले पारंपरिक शासकीय मार्ग पर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया है। गुनाया परिवार एवं एस.सी. समाज के लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
गुनाया परिवारजनों का आरोप है कि ग्राम के ही विक्रमसिंह पिता चेनसिंह सैंधव एवं लाखनसिंह पिता उदयसिंह सैंधव द्वारा सर्वे नंबर 589 (क्षेत्रफल 0.3000 हेक्टेयर) की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि उक्त भूमि पर मकान निर्माण कर शेष हिस्से में तार फेंसिंग कर मंदिर जाने वाला वर्षों पुराना रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे धार्मिक परंपराएं बाधित हो रही हैं। परिवार के वरिष्ठजनों ने बताया कि मंदिर और उससे जुड़ा मार्ग पूर्वजों के समय से प्रचलित है, जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामवासी करते आ रहे हैं। रास्ता बंद होने के कारण श्रद्धालु पूजा-अर्चना से वंचित हो रहे हैं।
कई बार आवेदन, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान -
प्रार्थियों ने बताया कि 16 जून 2025 एवं 24 जुलाई 2025 को तहसीलदार टोंकखुर्द को आवेदन देकर रास्ता खुलवाने की मांग की गई थी। राजस्व अमले द्वारा मौके पर पहुंचकर समझाइश के बाद रास्ता अस्थायी रूप से खुलवाया गया, लेकिन विधिवत चिन्हांकन नहीं किया गया। इसका लाभ उठाकर संबंधित व्यक्तियों ने पुनः तार फेंसिंग कर रास्ता बंद कर दिया।
इसके बाद 1 सितंबर 2025 को पुनः आवेदन दिया गया, जिस पर राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी से परेशान होकर ग्रामीणों ने 13 जनवरी 2026 को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत किया।
जनसुनवाई के बाद 16 जनवरी 2026 को पुलिस बल के साथ राजस्व अमले को 19 जनवरी को मौके पर कार्रवाई के आदेश जारी हुए। आरोप है कि प्रशासनिक दल मौके पर पहुंचा, लेकिन अतिक्रमणकर्ताओं के राजनीतिक प्रभाव के चलते केवल समझाइश और आश्वासन देकर बिना स्थायी समाधान के लौट गया।
10 फीट चौड़ा मार्ग चिन्हित करने की मांग -
गुनाया परिवार एवं समाजजनों ने प्रशासन से मंदिर तक कम से कम 10 फीट चौड़ा शासकीय मार्ग चिन्हित कर कब्जा दिलाने तथा मार्ग पर मुरम डालने की अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से शिकायत करेंगे।



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