ग्रेसिम ट्रेड यूनियन मोर्चा द्वारा नये श्रम कानूनो के विरोध में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित।
भारत सागर न्यूज़/नागदा। संयुक्त मोर्चा ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के तहत गुरुवार को केंद्र की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ तहसीलदार मधु नायक को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही श्रमायुक्त इन्दौर को भी पत्र प्रेषित किया गया। ज्ञापन में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा थोपी जा रही चार श्रम संहिताए-न्यूनतम वेतन, सुरक्षित रोज़गार, सामाजिक सुरक्षा, काम के समय और यूनियन बनाने के अधिकार की किसी भी गारंटी को खत्म कर देते हैं।
निजीकरण, ठेकाकरण और भर्ती न करने की नीतियों ने मौजूदा मज़दूरों और नौकरी ढूंढने वाले युवाओं को लगभग गुलामी की ओर धकेल रखा हैं। ट्रेड यूनियन बनाने के बुनियादी अधिकार की रक्षा, पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने, सेवानिवृत्ति अधिकार, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा, शिकायतों के निपटारे के लिए असरदार कानूनी व्यवस्था वगैरह के लिए भी ट्रेड यूनियन संघर्ष कर रहे हैं। हमारा मानना है कि मज़दूरों को उनके अधिकार दिलाना, देश के हित में सबसे ज़रूरी हो गया है।
इसके साथ रक्षा समेत सभी सामरिक उत्पादन तथा रेलवे, बिजली और ट्रांसपोर्ट समेत अन्य बुनियादी और ज़रूरी सेवाओं, बैंक और बीमा जैसे देश के वित्तीय संसाधनों का निजीकरण देश की आत्मनिर्भरता को पूरी तरह से खतरे में डाल देगा और सरकार की आय पर असर डालेगा।
औद्योगीकरण के नाम पर खेती की ज़मीन ज़बरदस्ती अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन असल में यह अति अमीर लोगों के मनोरंजन सुविधाएं, वाणिज्यिक उपयोग, पर्यटन, रियल एस्टेट वगैरह के लिए है, जबकि सरकार बेशर्मी से भूमि अधिग्रहण कानून 2013 तथा वनाधिकार कानून को लागू करने से मना कर रही है।
मोर्चा द्वारा मज़दूरों और किसानों के हित में और हमारे देश के हित में निम्न मुद्दों को गंभीरता से हल करने की मांग की गई।
1. चार श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द किया जाए। किसी भी तरह से मज़दूरों का ठेकाकरण, आउटसोर्सिंग न हो। फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेन्ट पर रोक लगाए जाए। श्रम शक्ति नीति 2025 का प्रारूप वापस लें।
2. रू 26000/- प्रति महीने की राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तथा रू 10000/- प्रतिमाह पेंशन लागू करें। सभी श्रमिकों, जिसमें संगठित, असंगठित, योजना कर्मी, ठेका श्रमिक और कृषि क्षेत्र शामिल हैं, के लिए सामाजिक सुरक्षा हितलाभ सुनिश्चित करें।
3. रक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, कोयला, परिवहन, बंदरगाह, तेल, भेल, स्टील समेत सभी सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण न हो। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन समाप्त हो। कोई प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं हो, खेती के पंपों के लिए मुफ़्त बिजली, घरेलू उपभोक्ताओं और दुकानों को 300 यूनिट मुफ़्त बिजली दी जाए; बिजली सुधार बिल 2025 वापस लिया जाए।
4. सभी को पेंशन दिया जाए- पुराने पेंशन की बहाली की जाए। ईपीएफ-95 के तहत पेंशनर्स को मूल्य सूचकांक के साथ जोड़कर प्रति माह रू 9,000/- का पेंशन दिया जाए, जो किसी भी पेंशन योजना के अंतर्गत शामिल नहीं हैं उन सभी को प्रति माह रू 6,000 पेंशन दी जाए।
5. सभी के लिए रोज़गार और सेवा सुरक्षा की गारंटी हो। मनरेगा योजना में 200 दिन काम और 700 रुपये/दिन की मज़दूरी हो। इसे शहरी इलाकों में भी बढ़ाया जाए। मनरेगा से परिवारों को बाहर करने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए। बकाया मज़दूरी दी जाए।
6. महंगाई पर रोक लगाएं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मज़बूत करें। सभी के लिए अच्छी क्वालिटी की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुनिश्चित किया जाए। सभी के लिए 60 साल की उम्र में 10,000 रुपये प्रति महीने की पेंशन दी जाए। संसाधन के लिए सुपर-अमीर लोगों पर टैक्स लगाएं।
7. समाज में सांप्रदायिक विभाजन को रोकने और उन्हें असरदार तरीके से लागू करने के लिए सख्त कानून बने । संविधान में बताए गए धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को कायम रखा जाए।
इस मौके पर एचएमएस से राजेन्द्र अवाना, अशोक शर्मा, राजेन्द्र सिंह, विजयसिंह राठौर, एटक से हृदयकुमार चंद, दिलीपा पांचाल, सोमदेव पाल, प्रभुलाल राठौर, किशोर मिश्रा, अजय, इंटक से गुरूदत्त उपाध्याय, ब्रजमोहन चौहान, राजेन्द्र रघुवंशी, अरूण शुक्ला सहित बड़ी संख्या में मोर्चा के सदस्य मौजूद रहे।




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