विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस: टेक ट्रक के जरिए गाँव की बेटियाँ सीख रहीं विज्ञान और तकनीक


भारत सागर न्यूज/उज्जैन। आज विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। यह दिवस विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग  के क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी को बढ़ाने और उन्हें समान अवसर देने के उद्देश्य से मनाया जाता है।ग्रामीण भारत में जहाँ आज भी कई जगह लड़कियों की शिक्षा को लेकर सीमित अवसर और सामाजिक सोच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं मेरा गाँव मेरी दुनिया  की “टेक ट्रक” जैसी पहल इस तस्वीर को बदलने का काम कर रही है।




यह कार्यक्रम गाँव की बेटियों को विज्ञान और तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भरता और करियर की नई दिशा दे रहा है।टेक ट्रक: चलती-फिरती विज्ञान प्रयोगशालामेरा गाँव मेरी दुनिया (MGMD) द्वारा वर्टिक्सस कंपनी के सहयोग से संचालित टेक ट्रक एक अनोखा मोबाइल लर्निंग मॉडल है, जिसे विशेष रूप से स्कूलों और ग्रामीण समुदायों में विज्ञान और तकनीक की व्यावहारिक शिक्षा पहुँचाने के लिए तैयार किया गया है।यह ट्रक एक चलती-फिरती प्रयोगशाला  की तरह कार्य करता है, जहाँ बच्चों को केवल किताबों में पढ़ाने के बजाय प्रयोग करके सीखने का अवसर मिलता है। टेक ट्रक का उद्देश्य है कि ग्रामीण बच्चों—विशेषकर लड़कियों—में वैज्ञानिक सोच, तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास विकसित हो, ताकि वे भविष्य में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।




टेक ट्रक में कौन-कौन से कोर्स शामिल हैं?

मल्टी स्किल फाउंडेशन कोर्स के अंतर्गत बच्चों और युवाओं को कई महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी एवं तकनीकी कौशल सिखाए जाते हैं। इस कोर्स में उन्हें बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग, उपकरणों की पहचान, सोलर सिस्टम की मूल समझ, सुरक्षा नियम (सेफ्टी मेजर्स), समस्या समाधान, टीमवर्क और प्रैक्टिकल तरीके से काम करने की आदत विकसित कराई जाती है। इसके साथ ही कोर्स में कारपेंट्री (लकड़ी का काम), सिविल वर्क जैसे निर्माण संबंधी बेसिक कार्य, कृषि आधारित कौशल जैसे जैविक/प्राकृतिक कीटनाशक (पेस्टिसाइड) बनाना, खेती से जुड़ी वैज्ञानिक समझ और स्थानीय संसाधनों का उपयोग भी शामिल है। 




यह कोर्स बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य के स्किल-बेस्ड करियर और स्वरोजगार के लिए तैयार करता हैगाँव की बेटियाँ बन रहीं तकनीक की नई पहचानटेक ट्रक के माध्यम से जब स्कूलों में  जब एलेक्टोनिक्स की गतिविधियाँ कराई जाती हैं, तो कई बार शुरुआत में लड़कियाँ झिझकती हैं। लेकिन जैसे ही उन्हें उपकरणों को छूने, वायरिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग जोड़ने और प्रयोग करने का अवसर मिलता है, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे आती हैं।




एक छात्रा ने कहा—

“पहले मुझे लगता था कि मशीनें लड़के ही चलाते हैं, लेकिन अब मैं भी वायरिंग जोड़ना सीख रही हूँ और आसानी से ड्रिलिंग के साथ साथ वेल्डिंग भी कर लेती हूँ ।”एक शिक्षक ने कहा—“जब बच्चे प्रयोग करके सीखते हैं तो उनकी समझ ज्यादा मजबूत होती है। खासकर लड़कियों में आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता दिख रहा है।”




वहीं एक अभिभावक ने कहा —

“हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी बेटी  बिजली के बारे में और विज्ञानं के बारे में ऐसे गाँव में सीख पाएगी। अब वह घर पर भी हमें नई बातें बताती है।

”सोशल कैपिटल क्रेडिट के जरोये लड़कियां करती है स्कूल में बदलाव 

 इस प्रोजेक्ट में लड़कियां न केवल सीखती है बल्कि उन्हें सीखने के बाद सोशल क्रेडिट पॉइंट्स मिलते है जिनके जरिये वो सामान खरीदती है और अपने स्कुल में अलग अलग तरह के बदलाव करती है । इस तरह न केवल सीखने का अवसर मिलता है बल्कि उसे उपयोग में लाकर स्कुल बदलने का भी मौका मिलता है । ऐसे कई सोशल प्रोजेक्ट जैसे स्कुल में मंच बनाना, स्कुल में एनर्जी का सिस्टम ठीक करना इतियादी प्रोजेक्ट्स लडकिय डिजाइन करती है ।



विज्ञान दिवस का संदेश : -

बेटियों को अवसर मिलेगा तो देश बदलेगाविज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस हमें याद दिलाता है कि विज्ञान और तकनीक में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल समानता का विषय नहीं, बल्कि देश के विकास की आवश्यकता है।टेक ट्रक जैसी पहल यह साबित कर रही है कि यदि संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण भारत की बेटियाँ भी वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल के साथ भविष्य की नई संभावनाएँ बना सकती हैं।



संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्नेयाम  कहा कि ये सुविधा भारत की हर ग्रामीण लड़की को मिलना चाहिए तभी भारत में लड़कियों की भागीदारी काम में खासकर तकनीक में बढेगी और भारत पांच ट्रिलियन इकोनोमी का आंकड़ा गरीबी को दूर करते हुवे छू पायेगा । एक उदाहरण देते हुवे उन्होंने कहा की गाँव की एक लड़की बुलबुल ने साहस दिखाया और अपनी बल्ब बनाने की कंपनी खोलने का निर्णय लिया । वर्तमान में वो आसपास के क्षेत्र में खुद बल्ब बनाकर उनका सप्लाई कर रही है। टेक ट्रक वर्तमान में उज्जैन जिले के 12 स्कुल के साथ काम कर रहा है और आंगे संस्था की योजना इसे उज्जैन जिले के विभिन्न स्कूलों में ले जाने की  तैयारी में है।

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