पांदा जागीर में उतरी कबीर वाणी की गंगा, मालवा कबीर यात्रा का आत्मीय स्वागत, संत परंपरा से सराबोर हुआ।
भारत सागर न्यूज/देवास। जब संत कबीर की वाणी गूंजती है तो वह केवल शब्द नहीं रहती, वह चेतना बनकर जन-जन के भीतर उतर जाती है। ऐसा ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृश्य ग्राम पांदा जागीर में देखने को मिला, जब मालवा कबीर यात्रा का आगमन हुआ और पूरे ग्राम ने खुले हृदय से उसका भव्य स्वागत किया।
सतनाम सेवा समिति जागीर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने संत कबीर की निर्भीक वाणी, प्रेम और समरसता के संदेश को पुनः जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। उनके स्वर में कबीर की साखियाँ और भजन जब गूंजे, तो वातावरण मानो आत्मा के भीतर तक उतर गया।
देश-विदेश से पधारे कलाकारों — गुजरात से मुरा लाला मारवाड़ी, राजस्थान से हेमंत गोयल, करण पोरवाल, दयाराम सरोलिया तथा टिपानिया की मंडली — ने कबीर के पदों की ऐसी प्रस्तुति दी कि श्रोता देर रात तक भक्ति और चिंतन में डूबे रहे। यह केवल भजन संध्या नहीं थी, यह आत्ममंथन का उत्सव था।
कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया — मानो कबीर के “ज्ञान” के दीप को अगली पीढ़ी तक सौंपने का संकल्प लिया गया हो। सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष शंकरलाल सोनेर, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह पांचाल, सचिव विष्णु नगर, कोषाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण नगरिया सहित समस्त कार्यकर्ताओं ने समर्पण भाव से कार्यक्रम को सफल बनाया। ग्राम पंचायत पांदा जागीर के सरपंच मुकेश हीरालाल गुर्जर ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि भेरूलाल अटारिया एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति और युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन राजेश परमार ने प्रभावशाली शैली में किया।
पांदा जागीर में यह पड़ाव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि संत कबीर की उस चेतावनी का स्मरण था जो हमें आडंबर से दूर रहकर सत्य, प्रेम और समता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। कबीर यात्रा ने यह संदेश पुनः स्थापित किया कि “साधो, ऐसा साधन कीजै” — जहाँ मन निर्मल हो और समाज समरस।
मालवा की धरती पर गूंजी यह कबीर वाणी देर रात तक आत्मा को स्पंदित करती रही, और पांदा जागीर संत परंपरा के प्रकाश से आलोकित हो उठा।





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