भव्य ‘श्री श्याम संकीर्तन’ का दिव्य आयोजन सम्पन्न, देर रात तक झूमे भक्त
- भक्ति रस में डूबा देवास: श्री श्याम संकीर्तन में उमड़ा जनसैलाब
भारत सागर न्यूज/देवास। जय माई की सामाजिक एवं धार्मिक सेवा समिति द्वारा मेंढकी रोड स्थित कलश गार्डन में भव्य “श्री श्याम संकीर्तन” का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। यह दिव्य आयोजन परम पूज्य गुरुदेव अरुण जी तिवारी के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
समिति सचिव योगेंद्र कावल ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य भक्तों को भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ना है। बाबा श्याम का आकर्षक दिव्य दरबार सजाया गया। संपूर्ण परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं फूलों से सजाया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। जैसे ही भजन संध्या का शुभारंभ हुआ, श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो गए।
कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश के प्रसिद्ध भजन गायक प्रमोद त्रिपाठी ने बाबा श्याम की महिमा का गुणगान करते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनके लोकप्रिय भजन “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा....”, “श्याम तेरी बंसी पुकारे आधी रात को...”, “मेरे श्याम की चौखट पे जो भी आया खाली ना गया” आदि अन्य भजनो ने उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वहीं राजस्थान की सुप्रसिद्ध भजन गायिका दिव्या ज्योति ने अपनी मधुर वाणी से माँ और बाबा श्याम के भजनों की अनुपम प्रस्तुति दी। उनके भजन— “श्याम नाम की ओढ़ लूं चुनरिया”...., “मेरे घर के आगे श्याम तेरा मंदिर बन जाए....”, “मैया तेरी जय जयकार...” पर श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर ताली और झांझ की धुन पर झूमते नजर आए।
भजन संध्या के दौरान इत्र व फूलों की जमकर वर्षा हुई। भक्तों ने सर्वप्रथम बाबा की ज्योत के दर्शन कर आहुति देकर दर्शन लाभ लिया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया, जिससे दूर-दराज के श्रद्धालुओं ने भी घर बैठे भजन संध्या का आनंद लिया। भजन संध्या के समापन पर भजन गायको सहित सभी कलाकारों का भगवा गमछा ओढ़ाकर व शील्ड भेटकर सम्मानित किया गया।
पूरी संध्या के दौरान भक्तों में अपार उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। समिति द्वारा आयोजन की सफलता पर सभी भक्तजनों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।








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