बच्चे की मौत, स्वास्थ्य विभाग की टीम जामनेर पहुंची, सीएमएचओ का दावा- चमकी नहीं, दिमागी बुखार था

देवास। देवास जिले की खातेगांव तहसील के गांव जामनेर के 9 वर्षीय असलम को चमकी बुखार जैसे लक्षणों के चलते शनिवार को इंदौर में भर्ती कराया था। उसने रविवार सुबह दम तोड़ दिया। असलम की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और खातेगांव से डॉक्टरों की टीम जामनेर पहुंची। यहां परिजनों सहित 36 बच्चों की रक्त पट्टिका बनाकर जांच की तो सभी सामान्य पाई गई। दोपहर में सीएमएचओ विजयकुमारसिंह भी पहुंचेपरिजनों से पूछताछ व बारीकी से जांच के बाद उन्होंने बताया असलम की मौत चमकी बुखार नहीं दिमागी बुखार के कारण हुई है। यदि चमकी बुखार होता तो उसके भाई, बहन व डेरे में रहने वाले बच्चे भी संक्रमित पाए जाते। नेमावर थानाक्षेत्र के गांव जामनेर में डेरे पर रहने वाले घुमंतू जनजाति के नौ वर्षीय असलम पिता इब्राहिम शाह को 21 जून शुक्रवार को रात 11 बजे तेज बुखार आया। शरीर ठंड से कांपने लगा। दो से तीन बार उल्टी व दस्त हुए व झटके भी आए। बच्चे ने बोलना बंद कर दिया। शनिवार सुबह परिजन उसे लेकर खातेगांव के शासकीय अस्पताल पहुंचे। यहां प्राथमिक इलाज कर डॉक्टरों ने हरदा रैफर कर दिया, जहां शासकीय अस्पताल से परिजनों को उसे इंदौर ले जाने की सलाह दी। इसके चलते परिजन असलम को हरदा के ही पल्स अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉ. पवन सोमानी ने इलाज के बाद इंदौर ले जाने की सलाह दी। परिजन असलम को लेकर जामनेर आ गए। यहां पूर्व सरपंच मनीष पटेल, कन्नौद जनपद अध्यक्ष ओम पटेल एवं खातेगांव नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील यादव को जब जानकारी लगी तो उन्होंने 108 का प्रबंध कर असलम को परिजनों के साथ एमवाय अस्पताल इंदौर पहुंचाया। जहां शनिवार रात 9.30 बजे असलम को आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, रविवार सुबह 5 से 6 बजे के बीच असलम की मौत हो गई। परिजन शव को एम्बुलेंस से लेकर सुबह 10.30 बजे जामनेर आए व कब्रिस्तान में दफना दिया। इधर, असलम की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। सुबह 11 बजे खातेगांव शासकीय अस्पताल से डॉ. आरिफ खान, डॉ. जुगलकिशोर जाटव, मलेरिया इंस्पेक्टर धर्मदास देवड़ा, बीईई राजेंद्र व्यास, बीपीएम ज्योति पटेल, एमपीएस कैलाश बैरागी, एएनएम सुमन कटारिया, पूनम अगारे एवं श्वेता मेश्राम पहुंचे जामनेर पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने रक्त पट्टिका बनाकर जांच की तो सभी सामान्य पाई गई। दोपहर करीब 2 बजे सीएमएचओ विजयकुमारसिंह व डॉ. जीएस बघेल भी गांव पहुंचे। परिजनों से पूछताछ कर बारीकी से अवलोकन किया। सीएमएचओ ने बताया असलम वायरल इंसेफेलाइट (मस्तिष्क ज्वर) से पीड़ित थाइसके कारण दिमाग में सूजन आने से बेहोशी की अवस्था में था। इसी कारण संभवत- उसकी मौत हुई है। क्योंकि चमकी बुखार होती तो उसके भाई-बहनों या डेरे में रहने वाले अन्य बच्चे भी संक्रमित पाए जाते जबकि ऐसा यहां किसी में भी नजर नहीं आया। करीब 25 वर्षों से ये घुमंतू जनजाति के लोग जामनेर में निवास कर रहे हैं। इन्हें गांव के लोग परदेशी नाम से पुकारते हैं। ये लोग रोजी रोजगार के लिए 8 माह तक अन्य प्रदेशों में घूमकर मदारी के खेल, करतब, जड़ी-बूटी आदि बेचने का काम करते हैं। बारिश शुरू होने से पहले वापस डेरे पर आ जाते हैं। बारिश खत्म होने के बाद वापस चले जाते हैं। इनके पीछे हर घर में एक-दो बुजुर्ग रहते हैं, जो घर की देखभाल करते हैं। ऐसे करीब 18 से 20 परिवार यहां रहते हैं। इनमें बड़ों और बच्चों को मिलाकर 100 से 150 लोग हैं। आसपास काफी गंदगी भी है। मुश्किल से 2 से 4 घरों में ही शौचालय हैं। शेष घर वाले खुले में शौच करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। जामनेर में जिस डेरे में असलम रहता था, वहीं के 2 और बच्चे बुखार के चलते खातेगांव के सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। जासीब पिता जावीद 8 माह का है जिसे 99.3 डिग्री बुखार है जो असलम के परिवार का ही है। वहीं शाकिर पिता शौकत 12 साल जिसे 102 डिग्री बुखार है। मृतक असलम के बड़े भाई जाविद शाह एवं मामा हलीम शाह ने बताया एमवाय अस्पताल में शनिवार रातभर इलाज करने के बाद रविवार सुबह हमें असलम की मौत की बात बताई। साथ ही एक कागज पर हमसे हस्ताक्षर भी करवाए, जिसमें लिखाहमें हमारे डॉक्टर ने समझाया कि बच्चे की हालत गंभीर है। हम अपनी मर्जी से उसे अस्पताल से ले जा रहे हैं। अगर बच्चे की तबीयत बिगड़ती है या जान जाती है तो अस्पताल प्रशासन या डॉक्टर नहीं होंगे। जबकि जाविद व उसके मामा हलीम का कहना है कि जब हमसे लेटर पर हस्ताक्षर करवाए गए उस समय हमें असलम का शव सौंपा जा रहा है। इससे कहीं न कहीं अस्पताल की लापरवाही सामने आई है। साथ ही शव को एंबुलेंस से घर तक लाए। यहां पूर्व सरपंच मनीष पटेल से 2600 रुपए उधार लेकर एंबुलेंस वाले को दिए। असलम सात से आठ दिन पहले ही अपने माता-पिता के साथ अमरावती जिले के आकोट से जामनेर आया था।


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