इंसानों के रंग बदलने से परेशान गिरगिट ने रंग बदलना छोड़ दिया.."संवाद" के कार्यक्रम में व्यंग्यकारों ने बिखेरे शब्दों के रंग
भारत सागर न्यूज/देवास । रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर शहर की साहित्यिक संस्था "संवाद" द्वारा आयोजित व्यंग्यपाठ में रचनाकारों ने अलग अलग विषयों पर अपने व्यंगों का पाठ कर शब्दों के रंग बिखेरे । व्यंग्यकार संदीप भटनागर ने अपने व्यंग्य "मगरमच्छ और गिरगिट" के संवाद के माध्यम से पढ़ा- "आदमी अपने फायदे के अनुसार रंग बदलना सीख गया है । रंगों को मजहब का रंग देकर,रंगों को रंगों से लड़ाते जब देखा तो हम गिरगिटों ने भी रंग बदलना छोड़ दिया,कौन सा रंग जान की आफत बन जाए इसलिए हम बैरंग ही भले" ओम वर्मा ने भी होली पर रंगों के बहाने राजनैतिक हालातों पर चुटकी ली । कार्यक्रम के शुरुवात में भावेश कानूनगो ने प्याज लहसून के परहेजियों पर लिखे व्यंग्य का पाठ किया । दीपक कर्पे ने अपने व्यंग्य में विविध अवसरों पर बजने वाले गीतों के बहाने अपनी बात कही । इसके बाद यशोधरा भटनागर ने सेवानिवृत्त लोगों को रायचंदो द्वारा दी जाने वाली सलाह पर लिखे अपने व्यंग्य का पाठ किया । युवा रचनाकार सुधीर महाजन ने अपने व्यंग्य पाठ से श्रोताओं को गुदगुदाया । सुरेंद्र राजपूत हमसफर के व्यंग्य को भी श्रोताओं ...