अपने हक की लड़ाई लड़ती 60 वर्षीय कमला बाई न्याय के लिए दर दर भटक रही है पर सिस्टम है की तरस ही नहीं करता




भारत सागर न्यूज/खाचरोद/संजय शर्मा । जी हा ये तस्वीर है 60 वर्षीय महिला कमला बाई जो खाचरोद तहसील के बुराना बाद की रहने वाली है जिसके पति रमेश की एक वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है और उसकी दो बेटी जिनका विवाह भी हो चुका है और अब घर में अकेली रहती है परंतु महिला पिछले कई दिनों से खाचरोद तहसील कार्यालय के चक्कर काट रही है इस भरोसे के साथ की उसे न्याय मिलेगा परंतु न्याय तो दूर उसे हर रोज तहसील कार्यालय से धिक्कार कर बाहर निकाल दिया जाता है।




हमारी टीम किस कारण बस तहसील कार्यालय पहुंची तब इस महिला को बाहर बैठा देख अजीब लगा ऐसा नहीं है की ये महिला पहली बार हमें दिखाई दी हमने इस महिला को पहले भी तहसील कार्यालय के बाहर बैठा देखा परन्तु आज हमने इस महिला से जो तहसील कार्यालय के बाहर हाथों में कुछ दस्तावेज लिए बैठे हुए देखा तो हमने उससे पूछ लिया की आप कौन हो और यहां क्यों बैठी हो तो महिला ने अपनी आप बीती बताई महिला ने बताया की महिला का नाम कमला बाई है और उनके पति रमेश जिनका निधन एक वर्ष पूर्व हो चुका है और घर में दो बेटी है।




जिसका विवाह मेने कर दिया मेरी पैतृक भूमि जो करीब तीन बीघा थी जिसके ऊपर पति की मौत के बाद उनके देवर ने कब्जा कर लिया और उन्हें उन्हें उनके खेत में जाने नहीं दिया जा रहा मेने इसके लिए जिला कलेक्टर , उज्जैन एस पी ऑफिस एस डी एम कार्यालय भी गुहार लगाई परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई यहां तक की में उज्जैन जिला कलेक्टर सुनवाई में भी गई वहां भी आवेदन किया परन्तु शिर्फ़ भरोसे के सिवा कुछ नहीं मिला मेने अपने जमीन के लिए तहसील कोर्ट में भी केस लड़ा जहां से में केस जीत भी गई फिर भी प्रशाशन ने मुझे मेरा हक नहीं दिलवाया गांव का पटवारी मुझ पर दबाव बना रहा है की आजाओ में तुम्हारा समझौता करवा देता हूं जब जमीन मेरी है जिसके साक्ष्य मय दस्ता वेज मेरे पास है तो कैसा समझौता कागज में भी मेरे नाम जमीन है।




पति के मरने के बाद हमारा पैतृक घर भी देवर ने हथिया लिया और अब में गांव के बाहर एक झोपडी में रही हू थोड़ी सी जमीन थी उस पर भी मेरे देवर कब्जा करके बैठे है महिला ने तो गांव के पटवारी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा की पटवारी की हेराफेरी से मेरे देवर ने खेत में कब्जा किया है मेने अपने खेत में गेहूं की फसल उगाई परंतु देवर ने मेरी फसल भी काट ली और राजनीति दबाव दिखाकर मुझे धमकाया और जान से मारने की धमकी दी एक बार तो में अपने खेत में गई तो मेरे साथ मार पीट की जिससे मेरे पीट में गंभीर चोट भी आई जिसकी मेडिकल रिपोर्ट भी मेरे पास है जिस समय मेरे साथ मारपीट की गई उसकी  सूचना मेने खाचरोद थाने पर भी दी परन्तु पुलिस नहीं पहुंची और गांव के लोग मुझे अस्पताल लेकर पहुंचे परन्तु आज में दो साल से अपनी हक की जमीन के लड़ रही हूं और हर रोज तहसील कार्यालय पहुंचती हूं की मुझे न्याय मिलेगा परंतु मुझे न्याय तो दूर मुझे तो रोज धक्के मारकर बाहर निकाल दिया जाता है मैने इसकी शिकायत सी एम हेल्पलाइन 108 पर भी की और तहसील कार्यालय से धमकाकर मुझे शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है अब में बेसहारा महिला कहा जाऊ क्या प्रशासन का इतना लचीला हो चुका है की गरीब विधवा महिला को उसका हक नहीं दिलवा सकता क्या मुख्यमंत्री के ग्रह जिले में गरीब महिला को न्याय नहीं मिलेगा जो दर दर न्याय की गुहार लगा रही है ।

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