श्री सूर्य विजय हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा की पूर्णाहुति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का किया आह्वान
भारत सागर न्यूज/देवास। श्री सूर्य विजय हनुमान मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा का विधिवत पूर्णाहुति हुई। आचार्य पं. देवराज शर्मा के प्रेरणादायी प्रवचनों के बीच कथा संपन्न हुई। श्रीराम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर आचार्य पं. देवराज शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए आचरण की पाठशाला है।
श्रीराम ने हर परिस्थिति में धर्म का पालन करते हुए यह सिखाया कि कर्तव्य पथ पर चलने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में महान होता है। चाहे पिता की आज्ञा का पालन हो, वनवास का स्वीकार हो या राज्य त्याग श्रीराम ने हर निर्णय में लोककल्याण को सर्वोपरि रखा।आचार्य श्री ने कहा कि आज के समय में जब परिवार और समाज में रिश्तों में कटुता बढ़ रही है, तब श्रीराम कथा हमें प्रेम, त्याग और मर्यादा का मार्ग दिखाती है। माता सीता के त्याग, लक्ष्मण के समर्पण, भरत के आदर्श और हनुमान जी की निष्काम भक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन चरित्रों से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन को संयमित और संस्कारित बना सकता है।
प्रवचन में उन्होंने यह भी कहा कि श्रीराम ने कभी भी अहंकार को अपने जीवन में स्थान नहीं दिया। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, जबकि विनम्रता और क्षमा उसे ईश्वर के समीप ले जाती है। श्रीराम कथा का मूल संदेश यही है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः विजय को प्राप्त करता है।
पूर्णाहुति के अवसर पर विधिवत हवन, पूजन एवं महाआरती संपन्न हुई। इस अवसर पर टीविधायक राजमाता श्रीमंत गायत्री राजे पवार, शुभम चौहान ओम जोशी, मनीष सेन, देवेंद्र नवगोत्री, सुरेश सरोलिया, रेखा वर्मा, संध्या आचार्य, नरेंद्र नख़ेत्री कायथा, हजारी हवलदार शुजालपुर, अनुज पांचाल उज्जैन, सुरेंद्र सिंह राजपूत हमसफर, विजय शर्मा गोपी उज्जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की।
कवि शशिकांत यादव ने अपनी राम भक्ति की कविता से सभी को भावमय कर दिया। मंदिर परिसर में “जय श्रीराम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति की महिलाओं ने आचार्य पं. देवराज शर्मा एवं समस्त श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। यह जानकारी महिला मंडल की विनीता व्यास ने दी।





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