गिरीराज महोत्सव की कथा हमें अहंकार छोडक़र ईश्वर और धर्म पर अटूट विश्वास रखने की सीख देती है- स्वामी शान्ति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज




भारत सागर न्यूज/देवास। कार्तिक मास में ब्रजवासी इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए पूजा की तैयारी कर रहे थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा, जिससे क्रोधित होकर इंद्र ने प्रलयंकारी वर्षा की। इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए, भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली (छोटी उंगली) पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी को आश्रय दिया, जिससे उन्हें गिरिराज धरण कहा जाने लगा। 




उक्त उद्गार सिविल लाइन गार्डन में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस महामंडलेश्वर 1008 श्री स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज ने कहीं। कथा के शुरू में सुप्रसिद्ध भजन गायक द्वारका मंत्री द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई। जिस पर भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। 




व्यासपीठ की पूजा मुख्य यजमान श्रीमती पुष्पा विपिन कुमावत, (सेवानिवृत्त नगर निगम इंजीनियर), आशीष कुमावत, गोवर्धन लाल कुमावत, प्रियंका कुमावत, सुरेश व्यास ने की। गुरू महाराज ने आगे कहा कि इंद्र के हार मानने और वर्षा रुकने के बाद, ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की और भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित किए, 




जो अन्नकूट का प्रतीक है। यह कथा हमें अहंकार छोडक़र ईश्वर और धर्म पर अटूट विश्वास रखने की सीख देती है। हमें इंद्र जैसे देवों पर नहीं, बल्कि भगवान पर निर्भर रहना चाहिए, जैसा कि कृष्ण ने सिखाया। छप्पन भोग और गिरिराज पूजन के माध्यम से भक्तों की श्रद्धा और सेवा भाव प्रकट होता है। 




कथा में छप्पन भोग लगाया गया व भक्तों ने गोवर्धन की पूजा की। कथा के पंचम दिवस कथा विश्राम की आरती श्रीराम कुमावत, ओपी पाराशर, गंगासिंह सोलंकी, श्रवण कुमार कानूनगो, केसी सिन्हा, एलएन मारू, मोहनसिंह राजपूत सहित अन्य गणमान्यजनों ने की। कथा में आज छठवें दिन महारास लीला के साथ रूक्मणि विवाह होगा। कथा की पूर्णाहूति 9 जनवरी को होगा।

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