बृहन्महाराष्ट्र मंडल के 74वें अधिवेशन के दूसरे दिन बही संगीत और साहित्य की सरिता




भारत सागर न्यूज/देवास। महाराष्ट्र समाज, देवास के आतिथ्य में आयोजित बृहन्महाराष्ट्र मंडल के 74वें वार्षिक अधिवेशन का द्वितीय दिवस (शनिवार, 28 फरवरी) कला, संस्कृति और वैचारिक विमर्श के नाम रहा। इस ऐतिहासिक अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जिससे देवास में लघु भारत का दृश्य जीवंत हो उठा।




अधिवेशन के जनसंपर्क प्रभारी उदय टाकलकर, अतुल मद्धव एवं शिरीष खड़ीकर ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत प्रातः 08 बजे मालवा की सुप्रसिद्ध निर्गुणी गायकी के साथ हुई। निर्मल निर्गुण से भक्तिमय हुई सुबह का आगाज़ पंडित कुमार गंधर्व की संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे कुमार गंधर्व के पौत्र एवं पंडित मुकुल शिवपुत्र के सुपुत्र पंडित भुवनेश कोमकली ने निर्मल निर्गुण कार्यक्रम के माध्यम से भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर किया। उनके शास्त्रीय गायन और निर्गुणी पदों ने श्रोताओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराया।सुबह के सत्र में खरगोन के विद्वान व्याख्याता दिलीप कर्पे ने रामाच्या पाऊलवाटेवर... विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रभु राम के जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा किया।




इसके पश्चात औपचारिक उद्घाटन पूर्व लोकसभा स्पीकर एवं 9 बार इंदौर की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन (ताई) के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में विख्यात रंगकर्मी अशोक समेळ, मण्डल अध्यक्ष मिलिंद महाजन,  मण्डल के प्रधान कार्यवाह दिलीप कुंभोजकर, मंडल के उपाध्यक्ष शेखर आमीन, समाज अध्यक्ष दीपक कर्पे एवं  महिला उपाध्यक्ष पूनम कुलकर्णी मंचासीन रहे। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया इस अवसर पर सरस्वती शिशुमंदिर भोंसले कॉलोनी की छात्राओं द्वारा मनमोहक सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। 




आयोजक महाराष्ट्र समाज, देवास की ओर से अतिथियों का स्वागत कार्यकारिणी सदस्य भूषण अत्रे, कार्याध्यक्ष उदय टाकलकर, कोषाध्यक्ष निलिंद म्हाडगुत , समाज प्रबंधक सदाशिव जोशी आदि ने किया गया। अपने उद्बोधन में सुमित्रा ताई ने अहिल्याबाई से लेकर समाज के लिए विशिष्ट कार्य करने वाली अनेक महिलाओं का वर्णन किया एवं प्रत्येक महाराष्ट्रीयन परिवार से एक व्यक्ति समाज को कुछ विशिष्ट उपहार प्रदान करें ऐसी अपील भी की।




शुभारंभ के अवसर पर देवास की लेखिका एवं कवि सुश्री ऋचा कर्पे द्वारा लिखित पुस्तक शेवटी संवाद महत्वाचा एवं पलाश सृजन द्वारा संकलित मध्यप्रदेश की मराठी भाषी स्वयंसिद्धाएं पुस्तकों का विमोचन एक बेहद गरिमामयी कार्यक्रम में किया।




दोपहर के सत्र में साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आयोजन हुए -

काव्य संगम-
अधिवेशन के इस महत्वपूर्ण सत्र में मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए कवियों श्रेयस गोखले (उज्जैन), अंतरा करवडे (इंदौर), ऋचा कर्पे (देवास) और विवेक सावरीकर (भोपाल)ने अपनी रचनाओं से वर्तमान परिवेश और सांस्कृतिक मूल्यों को रेखांकित किया।




मुक्त संवाद- आकाशवाणी पणजी की श्रुति हजारे ने अशोक समेळ और स्वानंद किरकिरे के साथ साक्षात्कार किया। इस संवाद में स्वानंद जी ने अपने फिल्मी सफर और समेळ जी ने रंगमंच के अनुभवों को साझा किया।




शाम को निकली भव्य मराठी गौरव शोभायात्रा -

अधिवेशन के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण शाम 05 बजे निकली मराठी गौरव शोभायात्रा रही। यह यात्रा मुख्य अधिवेशन स्थल मंडी व्यापारी धर्मशाला से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई महाराष्ट्र समाज, देवास पहुँची। अधिवेशन के दूसरे दिवस का समापन सत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। शाम 07 बजे से महाराष्ट्र समाज, देवास के राजकवि गोविंदराव झोकरकर स्मृति सभागृह में भक्तिरंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष संगीतमय सभा में सुप्रसिद्ध युवा गायक और सुपरस्टार छोटे उस्ताद के विजेता कुमार राजयोग धुरी (मुंबई)ने अपनी गायकी का जादू बिखेरा। पंडित अजीत कडकड़े के सुशिष्य राजयोग धुरी ने संतों के अभंग, विराण्या और भक्ति गीतों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिससे पूरा सभागार सात्विक आनंद से भर उठा। संगत कलाकार हारमोनियम-प्रवीण बांदकर, पखावज-प्रथमेश तारळकर, तबला-रामकृष्ण करंबेळकर, साइड रिदम-निर्गुण खोचे थे। कार्यक्रम के प्रातःकालीन सत्र का प्रारंभिक संचालन प्रेरणा दीवान तथा अन्य सत्रों का संचालन समाज की सचिव वृषाली आप्टे के साथ अंतिम कार्यक्रम का ओजस्वी और रसाळ शैली में सूत्र संचालन पणजी दूरदर्शन की प्रसिद्ध निवेदिका श्रुति हजारे द्वारा किया गया। उनकी धाराप्रवाह मराठी भाषा और प्रस्तुति ने कार्यक्रम के भक्ति रस से सराबोर कर दिया। अंत में आभार प्रदर्शन समाज अध्यक्ष दीपक कर्पे ने व्यक्त किया।

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