सोशल मीडिया के 'इंजीनियर' को भारी पड़ेगी नाली की खुदाई: जिसे बताया प्लास्टिक का सरिया, वह निकला स्टील से भी महंगा हाई-टेक मटेरियल
भारत सागर न्यूज/उज्जैन/संजय शर्मा । सोशल मीडिया पर वायरल होने के चक्कर में निर्माणाधीन इंदौर-उज्जैन रोड के काम पर सवाल उठाना एक युवक को भारी पड़ने वाला है। दरअसल, एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें युवक सड़क किनारे बन रही नाली में उपयोग हो रहे सरियों को प्लास्टिक का बताते हुए निर्माण में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा था।
वीडियो बनाने वाले ने हाथ से सरिया मोड़कर इसे घटिया बताया, लेकिन जब एमपीआरडीसी के चीफ इंजीनियर, जनरल मैनेजर और ब्रिज एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंची तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
जांच में सामने आया कि जिसे 'प्लास्टिक' बताकर बदनाम किया जा रहा था, वह दरअसल 'ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर' (जीएफआरपी) है। रोड निर्माण से जुड़े अधिकारी ललन अवस्थी ने बताया कि यह एक बेहद आधुनिक कंपोजिट सामग्री है, जिसे उच्च-मजबूती वाले कांच के रेशों और विनाइल एस्टर जैसे पॉलीमर को मिलाकर तैयार किया जाता है।
यह सरिया न केवल पारंपरिक स्टील से कहीं ज्यादा महंगा होता है, बल्कि इस पर कभी जंग भी नहीं लगती और यह बिजली व मैग्नेटिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहता है। इसकी मजबूती और पर्यावरणीय रेजिस्टेंस स्टील से कहीं बेहतर है, बस इसे स्टील की तरह साइट पर मोड़कर रीशेप नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद साफ कर दिया है कि विकास कार्यों को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने और विभाग की छवि धूमिल करने वाले इस शख्स पर अब सख्त लीगल कार्यवाही की जाएगी। तकनीकी ज्ञान के अभाव में किए गए इस स्टंट ने अब कानूनी मुसीबत का रूप ले लिया है।




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