होली एक, उसमें समाए अनेक भाव: साध्वी रेणुका देवी
- मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में साप्ताहिक सत्संग आयोजित
भारत सागर न्यूज/देवास। जाता हुआ बसंत, आती हुई ग्रीष्म की आहट और इनके बीच रंगों की भीनी-भीनी महक से सराबोर होली का पर्व हर वर्ष दिलों को जोड़ने का संदेश लेकर आता है। फाल्गुन मास का यह महोत्सव तन-मन को विविध भावनाओं से रंग देता है। खेतों में लहलहाती सरसों, पलाश के लाल फूल और प्रकृति की रंगीन छटा वातावरण को उत्सवमय बना देती है।
बालाजी नगर स्थित मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी रेणुका देवी (शिष्या, सतपाल महाराज) ने होली पर्व के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक है। रंग जहां मन को आनंदित करते हैं, वहीं जीवन में नई ऊर्जा और रागिनी भी भर देते हैं।
साध्वी जी ने भक्ति रस से ओतप्रोत फाग गीतों की प्रस्तुति देते हुए कहा कि फाल्गुन में ऋतुराज बसंत अपने पूर्ण यौवन पर होता है। इस समय प्रकृति भी मानो मानव के साथ उत्सव मनाती है। होली का उल्लास जीवन के अवसादों को दूर कर नई उमंग और आशा का संचार करता है।
उन्होंने होली के पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा सुनाई। बताया कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व समाज को नैतिकता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। पवन और अग्नि के सहयोग से होलिका का दहन और प्रह्लाद की रक्षा इस संदेश को सुदृढ़ करता है कि प्रकृति भी सत्य का साथ देती है।
साध्वी रेणुका देवी ने कहा कि “होली एक है, पर उसमें समाए भाव अनेक हैं।” यही कारण है कि यह पर्व जाति, वर्ग और धर्म की सीमाओं से परे समस्त समाज को एक सूत्र में पिरो देता है।
इस अवसर पर समिति के जिला प्रधान अंगूर सिंह चौहान, सचिव गोपाल कढ़वाल, रामेश्वर कुमावत, बाबूलाल अहिरवार, मदन लोदवाल, सुरेश चावंड, बंडूराव, पुष्कर गुप्ता, जगदीश प्रजापत सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।





Comments
Post a Comment