संघर्ष से सफलता तक: मानकुंवर बाई ने खेती और समाजसेवा से बनाई अलग पहचान
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस -
भारत सागर न्यूज/देवास। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देवास जिले की ग्राम छोटी चुरलाय की महिला कृषक मानकुंवर बाई राजपूत उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने खेती को न केवल आजीविका का साधन बनाया, बल्कि जैविक और मॉडल खेती के जरिए जिले का नाम प्रदेश और देशभर में रोशन किया।
मानकुंवर बाई आज ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बन चुकी हैं। पति के निधन के बाद जहां उनके सामने परिवार और दो बच्चों की जिम्मेदारी थी, वहीं उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खेती को अपने जीवन का आधार बनाया। परिश्रम और दूरदृष्टि के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए जैविक खेती को अपनाया और बाद में मॉडल खेती की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
मानकुंवर बाई की मेहनत और नवाचार ने उन्हें प्रदेश स्तर तक पहचान दिलाई। उनके उत्कृष्ट कृषि कार्यों के लिए मई 2015 में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा 50 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके बाद जून 2015 में भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्हें सम्मानित किया गया।
19 अगस्त 2015 को विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश शासन द्वारा राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार दिया गया। इसके अतिरिक्त उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें राज्य स्तरीय श्रेष्ठ किसान फर्टिलाइजर अवार्ड से भी नवाजा गया। जिला स्तर पर भी उन्हें अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
कृषि के क्षेत्र में उनके अनुभव और नवाचारों को देखते हुए उन्हें भोपाल और दिल्ली दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भी आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने किसानों के साथ अपने अनुभव साझा कर आधुनिक और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया।
मानकुंवर बाई केवल खेती तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रही हैं। वे गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए भी कार्य कर रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी मानकुंवर बाई सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे किसानों को जैविक खेती अपनाने, रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित करती रहती हैं। उनके प्रयासों से गांव में खेती के प्रति नई सोच विकसित हो रही है और कई किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
आज मानकुंवर बाई राजपूत का संघर्ष और समर्पण न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर कोई भी महिला हर चुनौती को अवसर में बदल सकती है। अपने कार्यों के माध्यम से उन्होंने देवास जिले का नाम प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में गौरवान्वित किया है।





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