शासकीय स्कूलों में दी जाने वाली राशि में हुए भ्रष्टाचार की जाँच आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही, सत्र 2020-2 021, 2021-2022 में हुआ था लाखों रुपए का भ्रष्टाचार
- सत्र 2020-2 021, 2021-2022 में हुआ था लाखों रुपए का भ्रष्टाचार
भारत सागर न्यूज/देवास। शासकीय स्कूलों के बच्चों और स्कूल के लिए दी जाने वाली राशि में भ्रष्टाचार, अनियमितता और शाला विकास समिति के पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) उज्जैन संभाग उज्जैन मप्र द्वारा जांच की जा रही है। शिकायतकर्ता योगेश निगम ने बताया कि शासकीय स्कूलों में शासन द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित होती है। इन योजनाओं मे सत्र 2020-2021, 2021-2022 में तत्कालीन जिला शिक्षा परियोजना अधिकारी (डीपीसी) जिला देवास हीरालाल खुशाल के निर्देशानुसार तत्कालीन विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक पुरूषोत्तम सिसोदिया और सारिका किंकर विकासखण्ड अकादमिक समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र देवास द्वारा शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया था। जिसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की गई थी। किंतु कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ इसका जांच अधिकारी बनाया। जहां मामले में लीपापोती देखने को मिली। जिसे देखते हुए शिकायतकर्ता निगम ने इसकी शिकायत आथिर्क अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) उज्जैन संभाग उज्जैन मप्र से की। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब ईओडब्ल्यू द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि कोविड काल में कोरोना टैबलेट के 5 फर्म के बिल तैयार किए गए और इन यह सभी बिलो के भुगतान कि राशि समान है। जैसे 4920 रुपये, 2460 रूपये 970 रूपये इस प्रकार 196380 रूपये निकाले गए और इन बिलो पर दिनांक भी नहीं है और इन टैबलेट का उपयोग किन छात्रो ने किया। शाला विकास समिति के अध्यक्ष/सचिव से जांच में इसकी पुष्टी नही की गई कि टेबलेट कहाँ से और कौन सी दुकान से क्रय किए और बिलो पर हस्ताक्षर और अध्यक्ष के हस्ताक्षर मेच किया जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके। शिक्षकों के एफएलएन प्रशिक्षण हेतु शिक्षकों की 1,94,400 रू और मास्टर ट्रेनरी की 90,000 रु की राशि आई थी, इस प्रकार कुल 284400 रुपये आई थी। इस राशि को निकाल कर जनशिक्षको के वेतन माह जुलाई 2022 में बांट दिया गया है। जो राशि माह जुलाई 2022 मे आई थी, वह राशि कहां गई और इसके अलावा प्रशिक्षण की व्यवस्था हेतु जो राशि आई थी उस राशि का भी दुरुपयोग किया गया है। प्रत्येक प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला की खेल सामग्री के लिए क्रमश: 5000 रुपये व 10000 रुपये शासन ने दिए। इस प्रकार सत्र 2020-2021 में कुल 1,72,0000 रुपये की राशि 3 फर्म के बिल लगाकर निकाले गए है। क्योंकि सभी बिलो मे सभी सामग्री एक समान एक ही मूल्य समान मात्रा व एक ही दिनांक अंकित है।
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कुछ बिलो का दोहरा भुगतान और एक ही नम्बर के है। कुछ बिलों में अध्यक्ष/सचिव के हस्ताक्षर नहीं होने के बाद भी भुगतान किया गया है। सत्र 2020-2021 में नि: शुल्क पाठ्य पुस्तक परिवहन के नाम से राशि 286905 रूपये व्यय की गई। जबकि शिक्षको का कहना है कि नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक हम बीआरसी कार्यालय से स्कूल में लेकर आए। जिसका प्रमाणीकरण मेरे द्वारा जाँच समिति को सौंपा गया। कोहिनूर स्टोर व राजपूत ट्रेडर्स के नाम से राशि 10,14,715 रुपये का व्यय मार्च माह में किया गया, जबकि मार्च माह से स्कूलो में परीक्षाओं की व्यस्तता होती है। इस दौरान सभी स्कूलों के शिक्षकों ने सामग्री वर्षभर क्रय न करते हुए, मार्च माह में इन्हीं दो फर्मों से ही क्यो क्रय की गई? जबकि पिछले 10 वर्षों के बिल अलग- अलग है क्योकि वह सामग्री शिक्षको ने क्रय की गई। जबकी राजपूत ट्रेडर्स से सामान के बिल बनाकर स्कूलो में पहुंचाए गए और उन पर हस्ताक्षर कर के मंगवाए गए। समिति द्वारा इन बिलो को भी अनदेखा कर निर्दोष साबित किया गया। जिन 13 स्कूलो से जाँच के लिए कथन लिए गये उन स्कूलो के स्टाफ पंजी, स्टॉक पंजी व केश बुक, पालक शिक्षक संघ रजिस्टर में जॉचकर्ता के हस्ताक्षर नहीं है। क्योंकि जाँचकर्ता इन स्कूलो में गए ही नहीं और करोड़ रूपये की जांच जिला पंचायत देवास में बैठकर ही पूर्ण कर ली गई। कलेक्टर ने 7 दिवस मे जांच करने के आदेश दिए गए थे। उसके बाद भी 7 माह मे जाँच की गई। पूर्व में की गई शिकायत के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जांच समिति गठित की गई उसे सभी सदस्य जिला पंचायत देवास से लिए गए और पुरुषोत्तम सिसोदिया के समाज के और पुरुषोत्तम सिसोदिया की सेम ग्रेड के दो सदस्य लिए गए। समस्त कार्रवाई सतर्कता कार्यालय से न करवाते हुए जिला पंचायत देवास की मध्यान्ह भोजन शाखा से करवाई गई। सत्र 2023-24 में भी नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक परिवहन में लगभग 10 लाख रुपए का घोटाला शासन स्तर से प्रतिवर्ष लाखों रुपये की राशि परिवहन के नाम से आती है। उसके बाद भी स्कूलों में प्रतिवर्ष शिक्षकों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक बी.आर.सी. कार्यालय से दी जाती है और फर्जी बिल लगाकर राशि निकाल ली जाती है। सत्र 2022-23 में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक परिवहन घोटाले की शिकायत होने पर 2023-24 में पहले चरण में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक स्कूलों तक पहुँचाई गई और दूसरे चरण में फिर संकुलों पर शिक्षकों को बुलाकर नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक शिक्षकों को दी गई। जिससे साबित होता है कि तत्कालीन जिला शिक्षा परियोजना अधिकारी (डीपीसी) जिला देवास हीरालाल खुशाल, तत्कालीन विकास खण्ड स्त्रोत समन्वयक पुरुषोत्तम सिसोदिया एवं सारिका किंकर विकासखंड अकादमिक समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र देवास द्वारा शासकीय धन का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया गया है।
शिकायतकर्ता निगम ने ईओडब्ल्यू से मांग की है कि छात्र हित व गरीब बच्चों के हित में की गई शिकायत की निष्पक्ष जाँच की जाकर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए।

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