"भक्ति का असली प्रारंभ कब? शास्त्रों के वो गूढ़ प्रमाण जिन्होंने दूर किए वर्षों के भ्रम"
भारत सागर न्यूज/संजू सिसोदिया/सतवास। रविवार को देवास जिले के ग्राम लाल खेड़ी मंडी लोहारदा में संत रामपाल महाराज के एक दिवसीय जिला स्तरीय संत्सग का आयोजन किया गया। जिसमें दूर-दराज़ से सैकड़ों श्रध्दालु ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान भक्ति और श्रध्दा का ऐसा माहौल बना कि श्रद्धालु घंटो तक शांतिपूर्वक तत्वज्ञान की अमृतवाणी सुनते रहे। सत्संग के दौरान संत रामपाल महाराज ने बताया कि मनुष्य की असली भक्ति तब तक प्रारंभ नहीं होती, जब तक उसे 'तत्वज्ञान' की प्राप्ति न हो जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई साधक तत्वदर्शी संत के माध्यम से पूर्ण ब्रह्म की महिमा को समझ लेता है, तब वह दुनिया के अन्य भ्रमों को त्यागकर पूर्ण रूप से उस एक परमात्मा पर आश्रित हो जाता है। संत ने श्रीमद्भागवतगीता के अध्याय 2 श्लोक 53 का उल्लेख करते हुए बताया कि तत्व ज्ञान हो जाने पर नाना प्रकार के भ्रमित करने वाले वचनों से विचलित हुई तेरी बुद्धि एक पूर्ण परमात्मा में दृढ़ता से स्थिर हो जाएगी। तब तू योगी बनेगा अर्थात तब तेरी अनन्य मन से निःसंस्य हो कर एक पूर्ण प्रभु की भक्ति प्रारंभ होगी। इसके साथ ही गीता अध्याय...