‘’अमृत संचय अभियान’’ को लेकर कलेक्टर गुप्ता महाविद्यालीयन छात्रों के बीच पहुंचे

  • महाविद्यालीयन छात्र रूफ रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए कम से कम 10 घरों में जाकर नागरिकों को प्रेरित करें




भारत सागर न्यूज/देवास। जिले में जिला प्रशासन द्वारा अमृत संचय अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में महाविद्यालीयन छात्रों के सहयोग एवं सहभागिता को लेकर कलेक्टर ऋषव गुप्ता महाविद्यालीयन छात्रों के बीच पहुंचे। कलेक्‍टर श्री गुप्‍ता ने महारानी पुष्‍पमाला राजे पवार (जीडीसी) कॉलेज में लॉ कॉलेज, प्रेस्‍टीज कॉलेज और जीडीसी कॉलेज के विद्यार्थियों को अमृत संचय अभियान के संबंध में जानकारी दी। कलेक्‍टर गुप्‍ता ने कहा कि सभी विद्यार्थी पौधारोपण करें। उन्‍होंने सीडबॉल के माध्‍यम से पौधारोपण की जानकारी भी दी। इस दौरान संयुक्‍त कलेक्‍टर श्रीमती प्रियंका मिमरोट, जीडीसी प्राचार्य श्री भारत सिंह गोयल, डॉ अनिता भाना, सुश्री साफिया कुरैशी, सुश्री ईशा गोले सहित अन्‍य संबंधित उपस्थित थे। 


                      कलेक्‍टर गुप्‍ता ने कहा कि महाविद्यालीयन छात्र अपने परिवारजनों को रूफ रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के संबंध में जानकारी दें और रूफ रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए कम से कम 10 घर जाकर नागरिकों को प्रेरित करें। कलेक्‍टर गुप्‍ता ने कहा कि सौ लीटर बरसात के पानी में से सिर्फ 06 लीटर पानी जमीन में जाता है, बाकी बह कर निकल जाता है। बरसात के पानी को बचाने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना चाहिए। रूफ रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम का कुल खर्च मात्र 06 हजार रूपये है। 



                              घर में रूफ रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर हम लाखो लीटर पानी भूमि में पहुंचा सकते है।  कलेक्टर गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बरसात के जल को सहेजने का कार्य किया जा रहा है। यदि बरसात का पानी रूफ वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक के माध्यम  से जमीन में उतारेंगे तो निश्चित भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। ट्यूबवेल के पानी की हार्डनेस भी कम हो जायेगी, क्योंकि बरसात का पानी सॉफ्ट है। यही बारिश का पानी बहकर सडक़ों तक नहीं पहुंचेगा तो शहर में बरसात के मौसम में जल भराव की समस्या नहीं होगी।





वरिष्ठ पत्रकार और अभियान से जुड़े श्रीकांत उपाध्याय ने देवास के जल संकट को विस्तार से बताया उन्होंने कहा कि आज हम अपनी अगली पीढ़ी को पानी बचा कर उनके भविष्य को सुखद बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि, आज से 25 वर्ष पूर्व देवास में जल संकट की जो स्थिति थी आने वाले कल में अगर हमने इस ओर ध्यान नही दिया तो फिर से हमारी अगली पीढ़ी को  जल संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से हम देवास शहर में कई करोड़ लीटर पानी बचा सकते हैं। पानी का संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। पैंतीस-चालीस साल पहले ट्यूबवेल में पानी  100-125  फुट पर मिल जाता था, वही आज  600-700  फुट की गहरायी पर भी पानी नहीं मिल रहा है। भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे जाने से नदियाँ भी सूख रही हैं। भूमिगत जल का स्तर बढाने के लिए बरसात के जल का संचय करना आवश्‍यक है। 


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