निगम जिस दर पर पानी लेना चाह रही है उस दर के विपरीत जाकर आखिर महापौर निजी संस्था की दर पर पानी क्यों लेना चाहते है?
भारत सागर न्यूज/देवास। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देवास में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आए थे। इस दौरान महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को नगर निगम संबंधि छह मांगों का पत्र सौंपा गया था। जिस पर नेता प्रतिपक्ष प्रतिनिधि कांग्रेस पार्षद दल राहुल पवार ने सवाल उठाते हुए महापौर को पत्र लिखा है। पत्र में पवार ने बताया कि महापौर जी आपके द्वारा मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र मे जो मांग की गई है, उस पत्र मे बिंदु क्रमांक एक पर जो मांग की गई है, वह इस प्रकार है एनवीडीए द्वारा नगर पालिक निगम देवास को पेयजल हेतु जो पानी दिया जाता है, उक्त दर औद्योगिक क्षेत्र देवास को दिये जाने वाले पानी की दर से अधिक है, दोनों की दरों को समान किया जाने के निर्देश एवं नगर निगम देवास पर एनवीडीए द्वारा जो अधिभार लगाया गया है उसे माफ करने के निर्देश दिए जाने का निवेदन मुख्यमंत्री से किया गया है।
निगम देवास को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत प्रचलित दर रू. 22.60 पैसे प्रति हजार लीटर के हिसाब से बिलिंग किया जा रहा है, वही औद्योगिक इकाइयों को पानी वितरित करने वाली निजी संस्था देवास वाटर प्रोजेक्ट को कार्यपालन यंत्री नर्मदा विकास संभाग के द्वारा वर्ष 2024 के अप्रैल माह के बिलिंग के आधार पर रू. 10.46 पैसे के दर से शायद बिलिंग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री को दिए पत्र के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि महापौर चाहते है हमे निजी संस्था के दरो पर निगम देवास को पानी मिले जो अधिक दर है, जबकि निगम देवास को मप्र शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा पेयजल प्रयोजन के लिए नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत को घरेलू उपयोग एवं जल के लिए शासन के जल संसाधन विभाग के तय दर अनुसार नगर पालिक निगम देवास को यह पानी 20 पैसे प्रति घन मीटर के हिसाब से मिलना चाहिए। प्रतिवर्ष तय दर में 0.2 दो पैसे की वृद्धि होगी। इस दर पर निगम देवास को पानी मिलना चाहिए। जल संसाधन विभाग के तय दर अनुसार निगम को दर 20 पैसे प्रति घनमीटर वही निजी संस्था हेतु नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण भोपाल के द्वारा तय किया गया दर रूपये 10.46 अप्रैल माह के बिल के आधर पर और इस दर मे भी प्रतिवर्ष वृद्धि होगी, अगर निजी संस्था के दर पर निगम का पानी मिलता है तो वह दर बहुत अधिक है, जिससे निगम के ऊपर भविष्य मे आर्थिक बोझ पड़ेगा। अब सवाल यह उठता है कि, जल संसाधन विभाग द्वारा तय दर पर पानी की मांग ना करते हुए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा तय किए गए दर पर आखिर महापौर पानी क्यो लेना चाहते है, जो कि अधिक दर जबकि दरों के संबंध में निगम प्रशासन संबंधित विभागों से जो पत्र व्यवहार कर रहा है।
उन पत्रों में भी जल संसाधन विभाग द्वारा तय किए गए दरो का ही उल्लेख किया जा रहा है तो फिर आखिर क्यों आप निगम प्रशासन से विपरीत मांग कर रहे है यह स्पष्ट करें। वही पत्र में इसी बिंदु मे आपके द्वारा यह मांग की जा रही है कि, निगम देवास पर एनवीडीए द्वारा जो अधिभार लगाया गया है उसे माफ करने के लिए मुख्यमंत्री निर्देशित करे। महापौर जी जवाब दे कि आप किस अधिभार को माफ करने की मांग कर रहे हो, यह भी स्पष्ट करे, जबकि आपको स्पष्ट रूप से निगम देवास को पानी के बिल के रूप में मिले 530 करोड़ रूपये से अधिक के बिल को माफ करने की मांग करना चाहिए थी, लेकिन आपके द्वारा ऐसा नही करते हुए अधिभार माफ करने की मांग की गई। आखिर आप इस तरीके की मांग मुख्यमंत्री जी से क्यो की। क्या समाचार पत्रों मे सुर्खियां बटोरने के लिए जल्दबाजी मे लिखा गया पत्र था या जानबूझकर इस तरीके का पत्र मुख्यमंत्री जी को दिया गया इन सब प्रश्नों पर आप अपनी स्थिति स्पष्ट करे। पार्षद प्रतिनिधि ने यह पत्र निगम आयुक्त और सभापति को भी लिखा है।

Comments
Post a Comment