माया के बंधन में समर्पण भाव से भक्ति नहीं हो सकती- आचार्य अनिल शर्मा
भारत सागर न्यूज/देवास। जब तक माया के बंधन में बंधे हो तब तक भगवान की भक्ति समर्पित भाव से संभव नहीं है। इसलिए भक्त नरसिंह मेहता ने जो भंडार भरा था वह साधु संतों में लुटा दिया। कि जब तक धन रहेगा उसकी चौकीदारी करने के चक्कर में भजन नहीं हो पायेगा। इसलिए उन्होंने सोचा कि पहले धन को लुटाया जाए। जब आपके पास एक रुपया भी नहीं रहेगा उस स्थिति में भगवान के प्रति जो समर्पण भाव उठेगा की प्रभु जैसी तेरी इच्छा, तू चाहे भूखा रख या खाना खिला। जैसी तेरी मर्जी। क्योंकि वह उस समय पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पण कर देता है। इसलिए जब तक व्यक्ति के पास पैसा है।
तब तक वह पूर्ण समर्पण भाव के साथ भगवान की भक्ति नहीं कर सकता। यह विचार जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के शिष्य आचार्य अनिल शर्मा आसेर वाले ने बजरंग बली नगर विकास समिति द्वारा हनुमंतेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित नानी बाई मायरे के शुभारंभ अवसर पर प्रकट किए। उन्होंने आगे कहा कि एक संत ने भक्त नरसिंह मेहता से बोला कि बोलो क्या चाहिए वरदान मांगो। बोले महाराज मुझे ओर कुछ भी नहीं चाहिए बस राधा कृष्ण के दर्शन करवा दो । संत कहने लगे कि नरसिंह तेरा भाव बड़ा ऊंचा है। दर्शन होंगे जरूर लेकिन हम नहीं करवा सकते। तुम्हारा आराध्य कौन है। किसकी उपासना करते हो बोले भोलेनाथ बाबा की। तो बोले भोलेनाथ की उपासना करो। अगर शिव कृप हो गई तो कृष्ण दर्शन सहज हो जाएगा। नरसिंह अपने महल के अंदर गए। महल के नीचे बड़ा सुंदर शिवालय बना रखा था। जिसके चार द्वार है। सब दरवाजे बंद कर दिए। अपनी पत्नी से कहा कि देखो कुछ भी हो जाए एक दिन, दो दिन, 10 दिन, 15 दिन, महीना 2 महीना जब तक मैं बाहर नहीं निकलूं तब तक मुझे आवाज मत देना। दरवाजे बंद करके कहां की बाबा जब तक नहीं आओगे। तब तक मैं अन्न जल का त्याग कर दूंगा ।संत महात्मा अलख जगाते हैं, अंतर में ही जब अलख जाग जाए। तो परमात्मा की अनुभूति सहज ही हो जाती है। सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने नानी बाई के मायरे में शामिल होकर धर्म लाभ लिया।


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