संजा माता को दीवार पर सजाकर किया विधि-विधान से उद्यापन
भारत सागर न्यूज/देवास। मालवा की माटी में अनेक लोक परंपराएं, मान्यताएं और कथा-कहानियां प्रचलित हैं। जिन्हें पर्व के रूप में मनाया जाता है। ऐसी ही एक लोक परंपरा है संजा माता। मालवा के ग्रामीण अंचलों में घर-घर में गोबर से संजा माता की तरह-तरह की आकृतियां दीवार पर बनाकर उन्हें फूल, पत्तों और रंगीन कागजों-पन्नियों से सजाकर उनकी पूजा करती हैं। माँ चामुण्डा माता टेकरी के सामने स्थित भवानी सागर में कविता खलोटिया ने अपने घर पर संजा माता का उद्यापन कर दीवार पर संजा माता सजाई और विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की।
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कुं. खलोटिया ने बताया कि यह लोकपर्व चाहे जिस नाम से प्रचलित हो, लेकिन इतना तो तय है कि इसका सरोकार कुंवारी कन्याओं से ही है। उत्सव का शुभारम्भ भाद्रपद की पूर्णिमा से होता है। कहा जाता है कि सोलह दिनों के लिए संजा माता अपने पीहर लौटती हैं और वहां उनकी सहेलियां उनके साथ ख़ूब हंसी-ठिठोली करती हैं। उद्यापन के दौरान संजा माता गीत भी छोटी सी गाड़ी लुढक़ती जाए, उसमें बैठी संजा बाई...चूड़लो चमकाता जाय, बिछिया झमकाता जाय, नथनी झलकाता जाय, छोटी सी गाड़ी लुढक़ती जाए... भी गाया। उक्त जानकारी कपिल यादव ने दी।
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