बिना जांच थोक आपत्तियां ऑनलाइन चढ़ाने का आरोप....

- पूर्व विधायक गुर्जर ने बीएलओ पर दबाव के मौखिक आदेश निरस्त करने की मांग
Q



भारत सागर न्यूज/नागदा।
नागदा-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र में 23 दिसंबर 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने रजिस्ट्रीकरण अधिकारी श्रीमती नेहा साहू को एक पत्र लिखकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।




पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों द्वारा प्ररूप-7 के अंतर्गत थोक में आपत्तियां प्रस्तुत कर लगभग 5 हजार से अधिक वैध मतदाताओं के नाम विलोपित कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन आपत्तियों की निष्पक्ष जांच किए बिना बीएलओ पर दबाव बनाकर उन्हें ऑनलाइन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने के मौखिक निर्देश दिए जा रहे हैं। बीएलओ को डराने-धमकाने की भी बात पत्र में कही गई है।




गुर्जर ने पत्र में उल्लेख किया है कि बीएलओ द्वारा विधिवत सत्यापन के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी, इसके बावजूद 4-5 भाजपा पदाधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर आपत्तियां दाखिल की गईं। यदि इन आपत्तियों को बिना जांच ऑनलाइन अपलोड किया गया तो संबंधित मतदाताओं के नाम स्वतः मतदाता सूची से कट जाएंगे, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा।




पूर्व विधायक ने कहा कि मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक प्ररूप-7 आपत्ति की पृथक और विधिसम्मत जांच अनिवार्य है। यदि जांच में आपत्तियां सही पाई जाती हैं तो संबंधित बीएलओ के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आपत्तियां झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण पाई जाती हैं तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा जी31 एवं संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत आपत्तिकर्ताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।




पूर्व विधायक गुर्जर ने मांग की है कि बीएलओ को बिना जांच आपत्तियां ऑनलाइन अपलोड कराने संबंधी दिए गए मौखिक आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए तथा प्राप्त सभी आपत्तियों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। जांच में जो मतदाता वैध पाए जाएं, उनके नाम मतदाता सूची में यथावत रखे जाएं।




मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपि भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, भोपाल एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, उज्जैन को भी प्रेषित की गई है। अब देखना होगा कि निर्वाचन प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और मतदाता सूची की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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