गुणवत्तापूर्ण इलाज और महिला सशक्तिकरण के दावे करने वाले अमलतास अस्पताल में नया विवाद, कर्मचारियों से अभद्र भाषा का आरोप




भारत सागर न्यूज/देवास। देवास स्थित अमलतास अस्पताल स्वयं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। विज्ञापनों और खबरों में अस्पताल की छवि एक आदर्श संस्थान के रूप में दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट सवाल खड़े कर रही है।

अस्पताल में कार्यरत युवतियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पदस्थ एक ड्राइवर द्वारा ड्यूटी पर तैनात युवतियों को अंधाधुंध गालियां देने का मामला सामने आया है, जिसका एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि हमारा संस्थान नहीं करता, लेकिन मामला अस्पताल प्रबंधन तक पहुँच चुका है।




घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि अस्पताल से जुड़े कार्य के लिए कुछ युवतियों को वाहन से अन्य स्थान भेजा गया था। कार्य पूर्ण होने के बाद जब युवतियों ने ड्राइवर को वापस बुलाने के लिए फोन किया, तो ड्राइवर ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मां-बहन की गालियां देना शुरू कर दीं। इस घटना से युवतियाँ मानसिक रूप से आहत हुईं।
पीड़ित युवतियों द्वारा मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन आरोप है कि पूरे मामले को केवल एक माफीनामे के जरिए दबाने का प्रयास किया गया। न तो स्पष्ट अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने आई और न ही कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी अमलतास अस्पताल से जुड़े कॉलेज में एक छात्रा के कमरे में घुसकर गलत हरकत करने के प्रयास का मामला सामने आया था, जिसके बाद छात्रों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने का आश्वासन दिया था।
इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच अंतर को उजागर कर दिया है। बड़े-बड़े दावे करने वाले इस संस्थान में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले में जब अमलतास अस्पताल के सीओओ जगत रावत को ऑडियो भेजकर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि यह जांच केवल कागज़ों तक सीमित रहती है या वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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