सरकारी बिजली पर चल रहा निजी सीटी स्कैन सेंटर, जिला अस्पताल देवास में टेंडर शर्तों के उल्लंघन का मामला...
- 8 साल से अलग मीटर नहीं, जांच रिपोर्ट भोपाल भेजी गई, लाखों की बिजली खपत पर उठे सवाल
- शिवसेना के जिलाध्यक्ष की शिकायत पर संभागीय क्षेत्रीय संचालक ने कराई थी जांच कार्रवाई हेतु भेजा आयुक्त भोपाल
भारत सागर न्यूज/देवास। एमजी जिला अस्पताल देवास में संचालित निजी सीटी स्कैन सेंटर को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में निजी संस्था द्वारा संचालित सीटी स्कैन यूनिट पिछले लगभग आठ वर्षों से सरकारी बिजली कनेक्शन के सहारे संचालित हो रही है, जबकि निविदा की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि संस्था को अपने खर्च पर अलग बिजली मीटर, केबल और अन्य विद्युत व्यवस्थाएं स्थापित करनी होंगी।
मामले की शिकायत शिवसेना जिलाध्यक्ष सुनील वर्मा ने जिला चिकित्सालय सेसूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी प्राप्त कर 24 जुलाई 2025 को संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, उज्जैन को की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जांच दल गठित किया गया। जांच दल में उप संचालक डॉ. सव्यसांची तिवारी को जांच अधिकारी, लेखापाल महेश शिवनानी तथा स्टेनोग्राफर अनिता चौहान को सदस्य बनाया गया था।
जांच में क्या सामने आया -
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि पूर्व में गठित तत्कालीन कलेक्टर ऋषभ गुप्ता जी द्वारा जांच पर आकस्मिक मोबिलिटी वाहनों का 5 लाख से अधिक राशि बिना निवेदिता के संचालन करना पाया गया था जिसमें तत्कालीन सिविल सर्जन और आर एम ओ को वित्तीय अनियमित का जिम्मेदार माना था कलेक्टर ने सीएमएचओ को कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया था।
तत्कालीन सिविल सर्जन एमपी शर्मा और आरएमओ अजय पटेल पर कार्रवाई करना थी जिसे सीएमएचओ द्वारा नहीं की गई थीं, बिंदु क्रमांक 2 पर जिला अस्पताल देवास में संचालित सिद्धार्थ सीटी स्कैन सेंटर द्वारा निविदा शर्तों के अनुसार अलग विद्युत मीटर स्थापित नहीं कराया गया। रिपोर्ट में इसे अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन (ब्रांच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट) की श्रेणी में आने योग्य माना गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, उज्जैन ने 28 जनवरी 2026 को जांच प्रतिवेदन स्वास्थ्य आयुक्त, भोपाल को आगामी कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।
बिजली खपत का अनुमान -
सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 25 सीटी स्कैन किए जाते हैं। एक सीटी स्कैन में लगभग 2 यूनिट बिजली की खपत मानी जाए तो प्रतिदिन करीब 50 यूनिट और प्रतिमाह लगभग 1500 यूनिट बिजली उपयोग में आती है। इस आधार पर अनुमानित मासिक बिल लगभग 10,500 रुपये और वार्षिक खर्च ढाई लाख रुपये के आसपास बैठता है।
कोविड काल के दौरान जांचों की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी, जब एक दिन में 50 से 100 सीटी स्कैन तक किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्तमान में सामान्य मरीज से एक सीटी स्कैन के लिए लगभग 933 रुपये शुल्क लिया जाता है।
कोविड काल के दौरान जांचों की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी, जब एक दिन में 50 से 100 सीटी स्कैन तक किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्तमान में सामान्य मरीज से एक सीटी स्कैन के लिए लगभग 933 रुपये शुल्क लिया जाता है।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला देवास के कार्यालय द्वारा 6 नवंबर 2024 को लगभग ₹28,40,491 का बिजली बिल भुगतान स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि अस्पताल की कुल बिजली खपत में निजी यूनिट का हिस्सा कितना शामिल रहा होगा।
जांच रिपोर्ट भोपाल भेजे जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो न केवल बकाया विद्युत व्यय की वसूली, बल्कि अनुबंध शर्तों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। संसाधनों के उपयोग, निजी संस्थाओं की जवाबदेही और स्वास्थ्य संस्थानों में अनुबंध पालन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
जांच रिपोर्ट भोपाल भेजे जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो न केवल बकाया विद्युत व्यय की वसूली, बल्कि अनुबंध शर्तों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। संसाधनों के उपयोग, निजी संस्थाओं की जवाबदेही और स्वास्थ्य संस्थानों में अनुबंध पालन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।





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