कॉमरेड गोविन्द पानसरे की शहादत दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित
भारत सागर न्यूज/देवास। 20 फरवरी 2015 को शहीद हुए प्रख्यात वामपंथी चिंतक एवं लेखक कॉमरेड गोविन्द पानसरे की स्मृति में शहादत दिवस पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनकी चर्चित पुस्तक शिवाजी कौन थे पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि छत्रपति शिवाजी जनता के राजा थे। वे अपनी प्रजा का ध्यान उसी प्रकार रखते थे, जैसे एक पिता अपने बच्चों का विकास, भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखता है।
उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी वर्गों और जातियों के हित में कार्य किया। उनके संघर्ष तत्कालीन मुगल नवाबों से थे, न कि किसी धर्म, जाति या लिंग विशेष से। पुस्तक के माध्यम से शिवाजी के समावेशी और जनकल्याणकारी व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। वक्ताओं ने बताया कि 16 फरवरी 2015 को सुबह टहलने के दौरान अमन के दुश्मनों ने गोविन्द पानसरे पर गोली चला दी थी। गंभीर रूप से घायल पानसरे का 20 फरवरी 2015 को ब्रेच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया था।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि मानव की हत्या की जा सकती है, लेकिन उसके विचारों को कभी नहीं मारा जा सकता। इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गई हत्या का भी उल्लेख करते हुए असहिष्णुता और हिंसा की निंदा की गई। वक्ताओं ने बताया कि गोविन्द पानसरे साधारण पृष्ठभूमि से आए थे। जिस स्कूल में वे चपरासी थे, वहीं से शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक बने। उन्होंने जीवनभर अंधविश्वास उन्मूलन और सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य किया। उनके हत्यारों के विरुद्ध 11 वर्षों बाद भी मुकदमा जारी है और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई।
कार्यक्रम में भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को भी याद किया गया। राजेश चक्रवर्ती ने उनकी प्रसिद्ध नज़्में" बोल के लब आजाद हैँ तेरे, बोल की जुबां अब तक तेरी है. " एवं "हम देखेंगे की सब ताज गिराए जाएंगे, हर जुल्म मिटाया जायेगा." प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। स्थानीय कवियों की कवि गोष्ठी भी आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राधेश्याम पांचाल ने की। बहादुर पटेल, प्रतिभा कुमार एवं राधेश्याम पांचाल ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, जिसका श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया। प्राचार्य एफ.बी. मानेकर ने गोविन्द पानसरे के जीवन-दर्शन पर विस्तृत प्रकाश डाला कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रगतिशील हिंदी और बंगाली साहित्यकारों—वीरेन्द्र यादव, राजेन्द्र प्रसाद एवं शंकर जी—के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा उनके साहित्यिक योगदान को स्मरण किया गया। प्रगतिशील लेखक संघ के अगस्त 2023 में सम्पन्न 18वें राष्ट्रीय सम्मेलन के घोषणा-पत्र निर्माण में स्वर्गीय वीरेन्द्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका को भी याद किया गया। सभा में एक निंदा प्रस्ताव पारित कर ‘समता उत्सव’ में इतिहासकार प्रो. एस. इरफान हबीब पर हुए व्यवधान और सागर विश्वविद्यालय में छात्र संगठन एसएफआई के विद्यार्थियों पर कथित हमलों की निंदा की गई तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। कार्यक्रम में प्राचार्य एस.एल. परमार, भारत सिंह मालवीय, प्रतिभा कुमार, पन्नालाल मालवीय, ओमप्रकाश वागड़े, बाबूलाल वागड़े, राजेन्द्र राठौर, मोतीराम कलेशरिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन प्रलेस अध्यक्ष कैलाश सिंह राजपूत ने किया।




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