महाकाल वन में उतरी शिव की टोली: भूत-पिशाचों संग खेली गई गुलाल और फूलों की अनूठी होली
भारत सागर न्यूज/उज्जैन/संजय शर्मा। धर्मनगरी उज्जैन में होल का पर्व इस बार भी आस्था और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। शिप्रा तट स्थित प्राचीन महाकाल वन में आयोजित विशेष उत्सव ने श्रद्धालुओं को शिवमय कर दिया।
महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में भगवान शिव, माता पार्वती और उनके गणों की सजीव झांकी ने सभी को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल और पुष्पों की वर्षा कर उत्सव को रंगमय बना दिया। शिव के गणों के रूप में सजे युवाओं ने भूत-पिशाच और नंदी का स्वरूप धारण कर ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य प्रस्तुत किया। वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कैलाश पर्व स्वयं शिप्रा तट पर अवतरित हो गया हो।
परंपरा के अनुसार आयोजन स्थल पर चौसर की बिसात भी बिछाई गई और भगवान महाकाल के प्रिय प्रसाद ‘भांग’ को विधि-विधान से तैयार किया गया। महिला श्रद्धालुओं ने माता पार्वती के स्वरूप के साथ बैठकर मंगल गीत गाए और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
भक्त महेंद्र कटियार और पिंकी यादव ने बताया कि महाकाल वन की यह होली अपनी तरह की अनूठी है, जिसमें भगवान महादेव अपने परिवार और गणों के साथ उत्सव में शामिल होते हैं।
वहीं माता पार्वती का स्वरूप धारण करने वाली ख्वाहिश शर्मा ने कहा कि उज्जैन में शिव और शक्ति का विशेष वास है, इसलिए यहां की होली भक्ति और आस्था के रंगों से सराबोर रहती है।
गाजे-बाजे और चल समारोह के साथ निकले इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को गुलाल के रंगों से आच्छादित कर दिया। श्रद्धालु भगवान महाकाल की भक्ति में लीन होकर उत्सव का आनंद लेते नजर आए।









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