एआई बनेगा रोजगार और सुरक्षा का 'महा-ब्रह्मास्त्र'; 10 साल में 70 लाख नौकरियों की गारंटी, बसों और खेती में दिखेगा तकनीकी चमत्कार
भारत सागर न्यूज/उज्जैन/संजय शर्मा । आप कल्पना कर सकते हैं कि बस ड्राइवर को झपकी आते ही कोई अदृश्य शक्ति उसे जगा दे या किसान मोबाइल से फोटो खींचकर अपनी फसल का डॉक्टर खुद बन जाए? उज्जैन में आयोजित 'महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम' सम्मेलन में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के पूर्व महानिदेशक वी.के. सारस्वत ने भविष्य की ऐसी ही हकीकत पेश की। उन्होंने बताया कि भारत अब ड्रोन से आगे बढ़कर एआई आधारित तंत्रिका-तंत्र हथियारों की ओर बढ़ रहा है।
इस दौरान बेंगलुरु की विश्वना टेक्नो सॉल्यूशंस कंपनी में ए आई पर कार्य कर रहे रवि तेजा ने भविष्य में एआई से विकास से जुड़ी संभावनाओं पर खास चर्चा की। उन्होंने युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी साझा करते हुए बताया कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा,
बल्कि अगले पांच वर्षों में 10 लाख और आगामी दस वर्षों में हिंदी, गुजराती, मराठी, तेलुगु और तमिल जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने के लिए लगभग 70 लाख नए रोजगार पैदा करेगा। यह उन युवाओं के लिए बड़ा अवसर है जो अपनी मातृभाषा के माध्यम से भविष्य की तकनीक से जुड़ना चाहते हैं।
खेती के क्षेत्र में एआई अब किसानों का सबसे बड़ा सहारा बन रहा है। 'सटीक खेती' के जरिए किसान अपने मोबाइल से ही फसलों के फोटो खींचकर बीमारियों और खाद की जरूरत का पता लगा पा रहे हैं, जिससे लागत कम और पैदावार बढ़ रही है। वहीं, सुरक्षा के मोर्चे पर बेंगलुरु की सभी स्कूल बसों में एआई तंत्र लग चुका है, जो न केवल चालक की थकान और नींद को पहचानता है,
बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखता है। जल्द ही यह सुरक्षा कवच देश की सभी बसों का हिस्सा बनेगा। इसके साथ ही भारतीय रेलवे में एआई कैमरे अब किचन की स्वच्छता और भोजन की ताजगी की निगरानी कर रहे हैं। स्पष्ट है कि आने वाला समय एआई के जरिए सुरक्षा, स्वाद, खेती और लाखों नौकरियों की गारंटी देगा।







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