महाकाल मंदिर में दान की सुरक्षा का अभेद्य चक्रव्यूह: नकली आभूषणों के डर से अब हाईटेक मशीन रखेगी नजर




भारत सागर न्यूज/संजय शर्मा /उज्जैन। देशभर के प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे के नाम पर नकली सोना-चांदी मिलने के खुलासों ने हलचल मचा दी है। वैष्णो देवी, अयोध्या और बगलामुखी मंदिर में सामने आए करोड़ों के फर्जीवाड़े के बाद अब बाबा महाकाल का मंदिर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। महाकाल मंदिर में दान की गई बहुमूल्य धातुओं की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंदिर समिति ने त्रि-स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।



मंदिर में आने वाले हर एक दान की पल-पल की जानकारी सीसीटीवी कैमरों के जरिए रिकॉर्ड की जा रही है। दान पेटी खुलने से लेकर उसे कोठार में जमा करने तक की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। मंदिर समिति के कोठार प्रभारी और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी की मौजूदगी में ही आभूषणों का वजन और परीक्षण किया जाता है। दानदाता को रसीद देने से पहले सुनारों की तीन सदस्यीय टीम आभूषणों की बारीकी से जांच करती है, जिसके बाद ही उसे खजाने में सुरक्षित रखा जाता है।




दान की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उप प्रशासक एवं कोठार प्रभारी सिम्मी यादव ने बताया कि मंदिर प्रबंधन अपनी व्यवस्था को और आधुनिक बना रहा है। जल्द ही मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक हाईटेक मशीन स्थापित की जाएगी, जिससे सोने-चांदी के आभूषणों की शुद्धता का तत्काल सटीक पता चल सकेगा। 




इस आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक जांच टीम का अनुभव मिलने से महाकाल मंदिर की दान व्यवस्था का सुरक्षा घेरा और अधिक मजबूत और अभेद्य हो जाएगा।

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