यज्ञ की पूर्णाहूति के साथ संपन्न हुआ विशाल भंडारा मंडी धर्मशाला में हुआ श्रीकृष्ण सुदामा मिलन
भारत सागर न्यूज/देवास। स्थानीय मंडी धर्मशाला में चल रही 108 भागवत कथा के अंतर्गत पुष्पानंदजी महाराज के मुख से भागवत की गंगा बह रही है। महाराज ने उज्जैन का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के पूर्वज उज्जैन में रहते थे। श्रीकृष्ण भगवान की ससुराल भी उज्जैन में है, भगवान का गुरूकुल भी उज्जैन में ही है। कथा के अंतर्गत भगवान के 16108 विवाह का वर्णन किया। राम जन्म में जो शबरी थी वही सत्य भामा बनी और भगवान की पटरानी बनी। भगवान ने भीमासुर की कैद से 16000 कन्याओं को मुक्त कराया फिर उनसे विवाह करके 16000 कन्याओं को अपनी रानी बनाया सभी रानियों से भगवान को 10-10 पुत्र तथा एक कन्या पैदा हुई। महाराज ने नरसिंह के नानी बाई के मायरे का भी बड़ा सुंदर वर्णन किया। भगवान ने द्रोपदी के चीर हरण का वर्णन करते हुए बताया कि पांचों पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए, दुशासन द्वारा द्रोपदी का भरी सभा में चीर हरण करने पर द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया, भगवान पधारे दुशासन द्रोपदी की साड़ी खींच खींच कर थक गया पर साड़ी खत्म नहीं हुई। पांडवों के राजसुइ यज्ञ का कोषाध्यक्ष दुर्योधन को बनाया गया...