न्याय की कीमत तय करती खाकी! महिला थाना देवास की प्रधान आरक्षक रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार




भारत सागर न्यूज/देवास। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तमाम दावों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। महिला सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाने वाले महिला थाना देवास में पदस्थ प्रधान आरक्षक 771 शाहीन खान को लोकायुक्त पुलिस ने ₹10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त, भोपाल के निर्देशन में एवं पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद यादव के मार्गदर्शन में की गई।




मामला दिनांक 19 दिसंबर 2025 का है, जब आवेदक विशाल परमार ने लोकायुक्त पुलिस उज्जैन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी अर्चना द्वारा महिला थाना देवास में मारपीट एवं दहेज प्रताड़ना को लेकर आवेदन दिया गया है। इस आवेदन पर कार्रवाई न करने के एवज में महिला थाना देवास में पदस्थ प्रधान आरक्षक शाहीन खान द्वारा ₹15 हजार की रिश्वत की मांग की जा रही थी।




लोकायुक्त पुलिस द्वारा शिकायत का सत्यापन निरीक्षक दीपक के. सेजवार से कराया गया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद दिनांक 23 दिसंबर 2025 को ट्रैप दल का गठन कर योजनाबद्ध कार्रवाई की गई। ट्रैप के दौरान प्रधान आरक्षक शाहीन खान को आवेदक विशाल परमार से ₹10 हजार की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ दबोच लिया गया। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब पारिवारिक मामलों में ही शिकायतों को दबाने के लिए रिश्वत की सौदेबाज़ी हो रही है, तो गंभीर और अपराधिक मामलों में पुलिस की निष्पक्षता और ईमानदारी की स्थिति क्या होगी—यह बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। आम नागरिक के मन में यह आशंका और गहरी हो गई है कि न्याय अब कानून से नहीं, लेन-देन से तय हो रहा है।
हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद जिले में बेहतरीन पुलिसिंग, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन महिला थाना जैसे संवेदनशील संस्थान में सामने आई यह घटना न केवल पुलिस विभाग की साख को धक्का पहुँचाती है, बल्कि उनके प्रयासों पर भी प्रश्नचिह्न लगा देती है। लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी प्रधान आरक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले को केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित रखा जाएगा या फिर पुलिस व्यवस्था को भीतर से साफ करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी ठोस कार्रवाई होगी।

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