कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस पर सतलोक आश्रम उड़दन में भव्य समागम, 35 जोड़ो का दहेज-मुक्त विवाह व 273 यूनिट रक्तदान




भारत सागर न्यूज/बैतूल। जिला बैतूल के ग्राम उड़दन स्थित सतलोक आश्रम में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के अवसर पर संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय महाविशाल समागम का बुधवार को दूसरा दिन श्रद्धा, सेवा और सामाजिक सुधार के संदेश के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने पापनाशक भंडारे का लाभ लिया।




आश्रम के सेवादारों ने बताया कि आज से 508 वर्ष पूर्व कबीर साहेब जी ने समाज में फैले उस पाखंड का खंडन किया था, जिसमें यह धारणा फैलाई गई थी कि काशी में मरने से स्वर्ग और मगहर में मरने से नरक प्राप्त होता है। इसी भ्रांति को समाप्त करने हेतु कबीर साहेब जी मगहर से लाखों हिंदू-मुस्लिम अनुयायियों के समक्ष सशरीर सतलोक गए थे। उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में यह महाविशाल समागम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें संपूर्ण मानव समाज को आमंत्रित किया गया है।




समागम में शुद्ध देशी घी से बने लड्डू, सब्जी, पूड़ी, दाल, चावल एवं हलवा का विशाल भंडारा श्रद्धालुओं को कराया गया। साथ ही संत गरीबदास जी महाराज द्वारा रचित अमर ग्रंथ साहिब की अमरवाणी का अखंड पाठ भी निरंतर चल रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन संत रामपाल जी महाराज जी के समाज सुधार अभियानों के अंतर्गत मात्र 17 मिनट में गुरुवाणी के माध्यम से 35 जोड़ो का आदर्श दहेज-मुक्त विवाह संपन्न कराया गया। इसके अतिरिक्त जिला चिकित्सालय बैतूल से आए चिकित्सा स्टाफ की उपस्थिति में अनुयायियों द्वारा 273 यूनिट रक्तदान किया गया तथा 3585 लोगों ने देहदान के संकल्प पत्र भरे।




बिना दहेज, बिना आडंबर और बिना फिजूलखर्ची के हुए इन विवाहों में सभी वर-वधू सादे परिधान में गुरुवाणी श्रवण करते हुए विवाह के पवित्र बंधन में बंधे, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बना। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आश्रम परिसर में 300×900, 90×900 एवं 60×900 फीट के विशाल पांडाल, भंडारे के लिए 350×200 फीट का पांडाल, जूता घर, पार्किंग, मोबाइल चार्जिंग, शौचालय सहित अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके साथ ही सृष्टि रचना पर आधारित आध्यात्मिक प्रदर्शनी, निःशुल्क नामदीक्षा, निःशुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा तथा अन्य रोगों के उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।




फोरलेन से आश्रम तक लगाए गए सूचना एवं आध्यात्मिक प्रदर्शनी बोर्ड श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। रात्रि के समय आश्रम की भव्य साज-सज्जा दीपावली पर्व जैसा दृश्य प्रस्तुत कर रही है। समाचार लिखे जाने तक लगभग 2750 श्रद्धालु संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा ग्रहण कर चुके थे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद यातायात, अनुशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रही, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है।समागम का अंतिम दिन 29 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए सर्व समाज के लोगों को आत्मीय आमंत्रण दिया गया है।

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