प्रेम में ही काया नगर का निर्माण होता है, बिना प्रेम के नही- सदगुरू मंगल नाम साहेब

- सबको चैतन्य करने वाला एकमात्र जीव है, उसके बिना सब जड़ है- सदगुरू मंगल नाम साहेब 




भारत सागर न्यूज/देवास।
सबको चैतन्य करने वाला एकमात्र जीव है। वह एक ही तत्व हट जाए तो सब तत्व जड़ हो जाते हैं। अग्नि, पृथ्वी, संसार की जितनी भी 84 लाख योनियों है, पशु पक्षी वृक्ष सब जड़ है। चैतन्य केवल जीव है, जीव और पवन से अनेक शरीरों का निर्माण हुआ है। 




जो विदेही होते हुए सब देह की रचना की है। लेकिन समस्त संसार की 84 लाख योनियों की देह से एक जीव पैदा नहीं होता देह अवश्य पैदा होती है। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सदगुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थलीय सेवा समिति मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित चौका आरती के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि विदेही से सब देह का संचालन हो रहा है। 




देह से एक विदेही पुरुष का संचालन नहीं हो सकता। जैसे किसी भी अनेक शरीरों से एक जीव एक बीज पैदा नहीं होता। 84 लाख योनियों का बीज एक है जीव। पुरे संसार की सारी देह से एक बीज पैदा नही होगा। देह अवश्य पैदा हो जाएगी। देह से जीव का निर्माण नहीं होता। जीव से ही देह का निर्माण होता है। 84 लाख योनियों का बीज एक है जीव। 




यह देखने समझने में नहीं आता। यह केवल सदगुरू से संवाद करने पर ही समझ में आता है। सदगुरू कहते हैं की प्रेम नगर में रहनणी हमारी। जहां प्रेम है वहां इस कायानगर का निर्माण होता है। बिना प्रेम के देह का निर्माण नहीं होता। चाहे मानव देह हो या पशु पक्षी की देह । प्रेम नगर में ही जीव की रहणी है। प्रेम नहीं होता तो जीव को देह में देखना मुश्किल था। किसी भी देह को हम जीव के द्वारा ही देख रहे हैं। लेकिन वह विदेही पुरुष है जीव जो किसी के हाथ नहीं आता। चैतन्य करने वाला मात्र एक जीव है। इस दौरान साध संगत द्वारा सदगुरू मंगल नाम साहेब को नारियल भेंट कर आशीर्वचन लिए। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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