खान-पान की बिगड़ी आदतें मनः स्थिति को प्रभावित करती है-संत प्रेमा दीदी

- (मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में आयोजित सत्संग समारोह में सतपाल महाराज की शिष्या ने किया मार्गदर्शन)




भारत सागर न्यूज/देवास।
बढ़ता तनाव या अवसाद आज के जीवन का कड़वा सच है। बच्चे हों या बूढ़े, महिलाएं हों या युवा, हर व्यक्ति इसकी गिरफ्त में है। इसके साथ ही तनाव के कारण उत्पन्न हो रहे मानसिक रोगों की भी बाढ़-सी आ रही है। 




अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दौर से गुजर रहे इस युग में यह स्वाभाविक भी है। लेकिन इसके लिए हमारी बिगड़ी जीवन शैली भी कम जिम्मेदार नहीं है। खान-पान की बिगड़ी आदतें, अस्त-व्यस्त दिनचर्या, गलत संग-साथ, अमर्यादित आचरण- व्यवहार, नकारात्मक चिंतन ये सब मिलकर व्यक्ति के तन-मन पर अपना घातक प्रभाव दिखा रहे हैं। 




खान-पान की बिगड़ी आदतें मानरू स्थिति को प्रभावित करती है, क्योंकि अन्न के अनुरूप मन का अपना सूक्ष्म विज्ञान है। अन्न के स्थूल हिस्से से हमारा शरीर बनता है, किंतु इसका सूक्ष्म अंश हमारे मन को गढ़ता है। ऐसे में तामसिक एवं राजसिक खान-पान तत्काल ही तन-मन की जड़ता एवं चंचलता का कारण बनते हैं तथा दीर्घ अंतराल में मन की अस्थिरता एवं विकृति को पुष्ट करते हैं। 




हमारी दैनिक जीवन शैली से संबंधित उक्त बातें बालाजी नगर स्थित मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग समारोह में सतपाल महाराज की शिष्या संत प्रेमा दीदी ने कही। उन्होंने कहा अस्त-व्यस्त दिनचर्या जीवन को अशांत, असंतुलित एवं तनाग्रस्त करने के लिए काफी है। जिसके मूल में होता है- जीवन लक्ष्य की अस्पष्टता एवं जीवंतता का अभाव, जिससे अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह सही ढंग से नहीं हो पाता। सही ढंग से कर्तव्यपालन न हो पाना एक बड़ी त्रासदी है, जो मानसिक असंतोष एवं अशांति का कारण बनती है। बड़ी संख्या उपस्थित अध्यात्म प्रेमियों को संबोधित करते हुए साध्वी जी ने आगे कहा गलत संगत, व्यक्ति को जीवन के श्रेष्ठ पथ से विचलित करती है। यह मन की स्वभावगत दुर्बलता को हवा देती है, जो सहज में इंद्रिय प्रलोभनों एवं सांसारिक सुख की ओर उन्मुख रहता है। गलत संग-साथ व्यक्ति की निम्नगामी वृत्तियों को ही भड़काता है और भोग विलास एवं सुख-लिप्सा में उलझाए रखता है। संत श्री ने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा हमारे दैनिक जीवन शैली से जुड़ी इन नकारात्मक आदतों एवं ढर्राे का परिमार्जन कर हम जीवन के तनाव, अवसाद एवं अशांति के कई कारणों का सहज निराकरण कर सकते हैं। साथ ही इनसे उपजे मनो रोगों को पनपने से रोक भी सकते हैं। खान-पान में सुधार तन-मन को हल्का, स्वस्थ एवं प्रफुल्लित रखने का आधार तैयार करता है। सु-व्यवस्थित दिनचर्या- समय पर अपने कर्तव्य कर्मों का निपटारा तथा कसी हुई दिनचर्या जहां सफल जीवन को सुनिश्चित करती है, वहीं जीवन में अपार संतोष का भी संचार करती है। सही संग-साथ मानसिक ऊर्जा को सुरक्षित रखता है, हमारी एकाग्रता को भंग नहीं होने देता तथा जीवन के प्रति सकारात्मक भाव पैदा करता है। लक्ष्य केंद्रित जीवन शैली जीवन के विकास के नित नए आयाम प्रस्तुत करती है। इस अवसर पर समिति के अंगुरसिंह चौहान, गोपाल कढ़वाल, रामेश्वर कुमावत, सुरेश चावंड, जगदीश प्रजापत, अशोक शर्मा, बंडूराव, बाबूलाल अहिरवार, बिहारी लाल यादव आदि उपस्थित थे।

Comments

Popular posts from this blog

आपत्तिजनक अवस्था में पकड़े गये देवास के मोहनलाल को उम्रकैद !

हाईवे पर होता रहा मौत का ख़तरनाक तांडव, दरिंदों ने कार से बांधकर युवक को घसीटा

सतपुड़ा एकेडमी में हुआ देवी स्वरूपा कन्याओं का पूजन