नेशनल लोक अदालत में 607 लंबित प्रकरणों एवं 271 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
जिला जनसम्पर्क कार्यालय, देवास
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- ’’नेशनल लोक अदालत में निराकरण कराने पर समय एवं धन की होती है बचत ’’- प्रधान जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र,,,
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- ’’नेशनल लोक अदालत में निराकरण कराने पर समय एवं धन की होती है बचत ’’- प्रधान जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र,,,
भारत सागर न्यूज/देवास। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास अजय प्रकाश मिश्र के मार्गदर्शन में शनिवार को जिले के समस्त न्यायालयों में वृहद स्तर पर इस वर्ष की द्वितीय ’नेशनल लोक अदालत’ का आयोजन किया गया। अजय प्रकाश मिश्र प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर अजय प्रकाश मिश्र प्रधान जिला न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि नेशनल लोक अदालत प्रकरणों के निराकरण का सरल सुलभ माध्यम है। इसमें समय एवं धन की बचत होती है। उन्होंने न्यायिक अधिकारीगण और अधिवक्तागण को अधिक से अधिक प्रकरणों में राजीनामा कराने के लिए प्रेरित किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास के तत्वावधान में आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवार न्यायालय, देवास ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। परिवार न्यायालय के न्यायाधीश जितेन्द्र कुशवाह द्वारा आज एकल बैठक में कुल 80 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।
लोक अदालत से 30 जोड़े साथ में घर गए। यह संख्या परिवार न्यायालय, देवास के इतिहास में किसी एक लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की सर्वाधिक संख्या है।उल्लेखनीय है कि पारिवारिक विवादों का निराकरण अत्यंत संवेदनशील एवं जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें पक्षकारों के मध्य सहमति बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे में एक ही दिन में 80 परिवारों को न्याय एवं राहत प्रदान किया जाना न केवल जितेन्द्र कुशवाह की न्यायिक कुशलता एवं अथक परिश्रम का परिचायक है, अपितु उन सभी परिवारों के लिए भी एक नई शुरुआत है जो लंबे समय से विवाद की स्थिति में थे। नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक, विद्युत अधिनियम, एनआईएक्ट, चैक बाउन्स, श्रम मामले, मोटर दुर्घटना दावा, बीएसएनएल आदि विषयक प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय देवास एवं तहसील स्तर पर सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द एवं बागली में 34 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया।
प्रधान जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र द्वारा विद्युत कंपनी, नगर निगम, बैंक, बीएसएनएल, बीमा कंपनी के स्टाॅल पर जाकर तथा खंडपीठों का भ्रमण कर समस्त संबंधित अधिकारीगण को लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में प्रकरण के निराकरण हेतु प्रेरित किया गया। राजीनामा करने वाले पक्षकारगण को स्मृति स्वरूप फलदार और फूलों के पौधे भेंट किये गये एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित किया गया। शुभारंभ कार्यक्रम में विकास शर्मा, विशेष न्यायाधीश, जितेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, उमाशंकर अग्रवाल प्रथम जिला न्यायाधीश, अभिषेक गौड़ पंचम जिला न्यायाधीश, प्रसन्न सिंह बहरावत चतुर्थ जिला न्यायाधीश, रविकांत सोलंकी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश,
भारत सिंह कनेल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रोहित श्रीवास्तव सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य न्यायाधीशगण श्रीमती साक्षी कपूर, श्रीमती पूर्णिमा कोठे राजन, नीलेन्द्र कुमार तिवारी, श्रीमती दीक्षा मौर्य, कुंवर युवराज सिंह, अभिजीत सिंह, श्रीमती किरण सिंह, सुश्री नेहा उपाध्याय, श्रीमती रश्मि अभिजीत मरावी, सुश्री मोनिता वानखेड़े, सुश्री चंद्रा पवार, सुश्री मुस्कान अरोरा, सुभाष चैधरी जिला विधिक सहायता अधिकारी, अशोक वर्मा, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ, अतुल पंड्या सचिव अधिवक्ता संघ, श्रीमती आरती खेडेकर, उपायुक्त नगर निगम, विद्युत कंपनी एवं बैंक के अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसेल स्टाॅफ, लोक अभियोजन अधिकारीगण, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकारगण उपस्थित रहे।
नेशनल लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की जानकारी -
देवास जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 607 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ है। संपूर्ण जिले में गठित 34 न्यायिक खंडपीठों में न्यायालयों के लंबित प्रकरणों में आपराधिक प्रकरण 172, मोटर दुुर्घटना के 11, चैक बाउन्स 87, फैमेली मेटर्स 68, विद्युत के 139, श्रम के 08, विविध के 103, सिविल के 19, कुल 607 प्रकरण निराकृत हुए जिसमें राशि 04 करोड़ 19 लाख 64 हजार 592 रूपये के अवार्ड की गई। निराकृत 11 क्लेम प्रकरणों में राशि 70 लाख 05 हजार रुपए के अवार्ड आपसी समझौते के आधार पर पारित किए गए। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के 87 प्रकरण निराकृत हुए जिनमें 01 करोड़ 64 लाख 43 हजार 845 रूपये के चैकों की राशि में सेटलमेंट किया गया। 55 लाख 35 हजार 150 रूपये की राशि के 19 सिविल प्रकरणों का निराकरण हुआ।271 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया है जिसमें रूपये 48 लाख 26 हजार 284 राशि के अवार्ड पारित किए गए है।
सफलता की कहानी -1
लोक अदालत में मिला सुखद साथः तलाक की धमकी और दहेज की कटुता भुलाकर पति-पत्नी फिर हुए एक साथ -
राष्ट्रीय लोक अदालत के मनोवैज्ञानिक प्रयासों से आज एक टूटता हुआ परिवार दोबारा बस गया। कुटुम्न न्यायालय देवास के प्रकरण में प्रार्थिया श्रीमती फरीदा बी (परिवर्तित नाम) और सलमान खान(परिवर्तित नाम) के मध्य चल रहा भरण-पोषण का विवाद सुखद तौर पर समाप्त हुआ। दोनों का निकाह वर्ष 2019 में हुआ था, किन्तु दहेज में रूपये, प्लाॅट और गाड़ी की मांग को लेकर दोनों के बीच कलह शुरू हो गई थी। बात तलाक की धमकी और मारपीट तक पहुच गई थी, जिस कारण पत्नी अपने दो बच्चों के साथ अलग रहने को मजबूर थी। न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह की पहल पर आज राष्ट्रीय लोक अदालत में उभयपक्ष को उपस्थित किया गया।
मामले की गंभीरता को को देखते हुए न्यायालय द्वारा करीब एक घण्टे तक दोनों की काउंसलिंग की गई। उन्हें बच्चों के भविष्य और दांपत्य जीवन के महत्व के बारे में समझाया गया, जिसके बाद पति-पत्नी साथ रहने को सहमत हो गये। पत्नी ने अपना प्रकरण सहमति से वापिस ले लिया। उभयपक्ष ने न्यायालय परिसर में ही एक-दूसरे को पुष्पहार पहनाकर तरीके से शिकवे दूर किये। न्यायालय द्वारा उन्हें नवीन तरीके से जीवन शुरू करने हेतु शुभकामनाओं के साथ ‘पौधे‘ भेंट किये गये। पत्नी ने अपना प्रकरण हंसो-खुशी वापिस लिया और परिवार पुनः साथ विदा हुआ।
सफलता की कहानी -2
न्यायालय के प्रयासों से खिले सबके चेहरे: लोक अदालत में 14 वर्ष पुरानी कड़वाहट भुलाकर साथ रहने को तैयार हुआ जोड़ा -
प्रधान न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह कुशवाह, कुटुम्ब न्यायालय देवास के अथक प्रयासों से नेशनल लोक अदालत में एक बिखरता हुआ परिवार पुनः एक हो गया। आपसी सहमति से तलाक के लिए विचाराधीन प्रकरण में देवेन्द्र्र (परिवर्तित नाम) एवं महिमा (परिवर्तित नाम) ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। उभयपक्ष का विवाह 15 वर्ष पूर्व हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। शादी के 2 माह बाद से ही वैचारिक मतभेद व आदर की कमी के कारण विवाद होने लगा था। उभयपक्ष ने धारा 13 बी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आपसी सहमति से तलाक का आवेदन पेश किया था। भरण-पोषण व दान-दहेज के सामान का लेन-देन भी हो चुका था। प्रकरण की अंतिम जांच के दौरान न्यायालय के प्रयासों से उभयपक्ष ने विचार करने का समय लिया। नेशनल लोक अदालत में करीब 1 घण्टे की समझाईश के बाद उन्हें दोनों संतानों के भविष्य व दांपत्य संबंधों की पुर्नस्थापना हेतु तैयार किया गया। उभयपक्ष तलाक का प्रकरण वापस लेकर पुनः नवीन तरीके से जीवन निर्वहन करने को तैयार हुये। न्यायालय परिसर में ही उन्होंने एक.दूसरे को पुष्पहार पहनाये। न्यायालय द्वारा उन्हें शुभकामनाओं के साथ पौधे भी भेट किये गये ताकि वे अपने रिश्ते को नवीन प्रकार से सींच सकें।








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