मानव द्वारा किया हुआ पाप व पुण्य कभी वापस नहीं होता- पं. चौबे
देवास। संगीतमय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ गायत्री मंदिर के पास विजयनगर में कलश यात्रा के साथ हुआ। प्रमोद व्यास ने बताया कि सोमवार को श्रीमद भागवत कथा का द्वितीय दिवस था। कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी व आसपास से भक्त पधार रहे है। व्यासपीठ से कन्नौद से पधारे आचार्य पं. भरत चौबे ने कहा कि आंख से निकला आंसू, मुख से निकला शब्द, शरीर से निकले हुए प्राण जिस तरह वापस नहीं होते उसी तरह मानव द्वारा किया हुआ पाप व पुण्य कभी वापस नहीं होता। महाराज श्री ने पराक्रमी भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए बताया कि भीष्म पितामह दुनिया के एक मात्र ऐसे योद्धा थे, जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था, लेकिन फिर भी उन्हें एक माह 26 दिन तक बाणों की शैय्या पर सोना पड़ा था। क्योंकि कर्म प्रधान है, उसको भोगना ही पड़ता है। भीष्म पितामह ने गांधार नरेश को अपने पराक्रम के बल पर डरा धमका कर उनकी पुत्री गांधारी को झूठ बोलकर अपने भतीजे धृतराष्ट्र से संबंध कराकर एक गरीब के साथ अन्याय का पाप किया था। दूसरा पाप भरी सभा में द्रोपदी की साड़ी खींचते हुए देखते रहे। उस बात की सजा से ही 56 दिन तक बाणों की शैय्या पर दुख भोगना पड़ा। व्यासपीठ की आरती मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध भजन गायक द्वारका मंत्री सहित आयोजनकर्ताओ और उपस्थित भक्तो ने की। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक चलेगी। कथा में विभिन्न प्रसंगो का सचित्र वर्णन होगा।
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