साहित्य का काम राजनीति के आगे मशाल लेकर चलने का ना की सत्ता के तलवे चाटने का- प्रेमचंद
भारत सागर न्यूज/देवास। प्रलेस का 90 वा स्थापना दिवस सेवानिवृत प्रिंसिपल एफ.बी. मानेकर की सदारत में मनाया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रलेस अध्यक्ष कुसुम वाघड़े व वंदना श्रीवास्तव द्वारा जोशीला जनगीत गाया गया। आज ही के दिन 9 व 10 अप्रैल 1936 में लखनऊ में महान कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की सदारत में महान तात्कालिक साहित्यकारों की उपस्थिति में गठन हुआ था। यह नेशनल अधिवेशन दो दिन चला। प्रेमचंद ने जरूरत बताते हुए कहा, हम चाहते है कि साहित्यिक केंद्रों में हमारी परिषदें स्थापित हो,
निबंध पढ़े जाएँ, बहस हो, आलोचना- प्रत्यालोचना हो। तभी वह वातावरण बनेगा। तभी साहित्य में नये युग का आर्विभाव होगा। प्रलेस सचिव राजेंद्र राठौर ने प्रेमचंद के एक लेख का वाचन किया। जिसमे उन्होंने महाजनी प्रथा का शोषण, वर्ण-व्यवस्था, समाजवादी समाज बनाने, आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक सरोकारों आदि मुद्दों को उठाया था। सम्मलेन के अंत में प्रेमचंद ने कहा था, हाँ हमारी कसौटी पर वह साहित्य खरा उतरेगा, जिसमे उच्च चिंतन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौन्दर्य का सार हो, सृजन की आत्मा हो, जीवन की सच्चाईयों का प्रकाश हो, जो हम में गति, संघर्ष और बेचैनी पैदा करे, सुलाए नहीं क्योंकि अब और ज्यादा सोना मृत्यु का लक्षण हैं।
इस अवसर पर गोष्ठी में संविधान बचाओ, देश बचाओ विषय पर कॉमरेड कैलाश सिंह राजपूत ने अपना वक्तव्य में कहा कि, देश में संविधान को मनुस्मृति द्वारा प्रतिस्थापित करने कि लगातार कोशिश की जा रही है। देश आज संकट में है। आज भाई को भाई से लड़वाया जा रहा है। बुलडोजर राज चल रहा है। 145 सांसदों को निलंबित करके क़ानून पास किये जा रहे है। मनमानी की जा रही है। एजुकेशन व हेल्थ अंतिम सांसे गिन रही है। दोनों ही क्षेत्रो में नकली डिग्री बांटी जा रही है। हाल हींमें मप्र में नकली सर्जन ने कई लोगो कि जान ले ली। दोनों फील्ड आम जनता की पहुँच से चन्द्रमा इतनी दूर जा चुके है। डेमोक्रेसी को पूँजीपतियों द्वारा खऱीदा जा चुका है।
जनता की हम दर्द पार्टी तो चुनाव ही नहीं लड़ सकती, क्योंकि वे कैॉर्पोरेट घरानो से चंदा नहीं लेती। आम जनता को घर घर में संविधान पर चर्चा करनी चाहिए व देश को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। संचालन प्रलेस अध्यक्ष श्रीमती कुसुम वाघड़े ने किया। उन्होंने 90 वर्षों के संगठन के कार्यों व महान लेखको के अवदान पर रौशनी डाली। एस एल परमार, भारत सिंह मालवीय, रेखा उपाध्याय, ओमप्रकाश वाघड़े, सत्यावन पाटिल, राजुल श्रीवास्तव, कवित्री चाँद ने भी सहभागिता की। आभार कॉमरेड कैलाश ने माना।
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