माया को छोड़कर परमात्मा की शरण में जाने से ही उद्धार होगा- भागवताचार्य पं. अजय शास्त्री
भारत सागर न्यूज/देवास। जिस स्थान पर कथा होती है, वह देवालय बन जाता है, वहां देवताओं का वास हो जाता है। पितरों के साथ-साथ कथा के माध्यम से देवताओं का आह्वान और महिमा मंडन करना बड़ा ही पुण्यमय कार्य है। यह पितरों की कथा है। इस कथा के माध्यम से यह ग्राम नारियाखेड़ा देवालय बन गया है।
जहां कथा होती है, वहां साक्षात भगवान विराजमान होते हैं। जैसे कोई व्यक्ति सागर में डूब रहा है तो उस समय उस डूबते हुए को मृत्यु का साक्षात दर्शन होता है और ऐसे में कोई बचाने आ जाए तो उससे बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं होता है।
यह विचार व्यासपीठ से पं. अजय शास्त्री सिया वाले ने राजोदा रोड ग्राम नारियाखेड़ा में चल रही श्रीमद पितृ भागवत कथा के दूसरे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा, कि वैसे ही इस सांसारिक जीवन में अगर हमें सदगुरु मिल जाए तो हमारा बेड़ा पार हो जाता है।
फिर हमें जीवन-मरण के चक्र से छुटकारा मिल जाता है। उन्होंने कहा, कि माया तो अपार है, लेकिन परमात्मा की महिमा अपरंपार है। इसलिए माया को छोड़कर परमात्मा की शरण में जाएं। माया को छोड़कर परमात्मा की शरण में जाने से ही उद्धार होग।
इस दौरान पं. शास्त्री ने तूने आंगन नहीं बुहारा, कैसे आएंगे भगवान हो कैसे आएंगे भगवान... की भावपूर्ण प्रस्तुति दी तो श्रद्धालु झूम उठे। पालसावदिया परिवार द्वारा व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर महाआरती की। सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।





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