भागवत हमें सिखाती है कि जब अहंकार मिटता है, तब भक्ति जागृत होती है - पं. देवराज शर्मा
- निःशुल्क श्री गयाजी तर्पण 24, 25 व 26 दिसंबर से
भारत सागर न्यूज/देवास। श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, यह तो भगवान का सजीव स्वरूप है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, जीव का लक्ष्य और परमात्मा से उसका शाश्वत संबंध अत्यंत सरल और मधुर रूप में बताया गया है। उक्त उदगार स्टेशन रोड गजरा गियर चौराहे के पास स्थित नूतन नगर में श्री हरिबोल सेवा समिति, श्री वैकुण्ठ धाम, श्री राधाकृष्ण सेवा समिति एवं श्री पित्रेश्वर महिला मंडल सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्री गयाजी तर्पण एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस आचार्य पं. देवराज शर्मा ने कहे।
आयोजन समिति के धर्मेंद्र सिंह परिहार, संजय बोर्डिया एवं अजय सेठिया ने बताया कि कथा के तृतीय दिवस के शुरू में बच्चों व हिन्दुओ को सनातन के प्रति जागृत करने के उद्देश्य से गुरु महाराज द्वारा 108 संगीतमय हनुमान चालीसा का पाठ कराया जाएगा। कथा के दौरान समिति द्वारा दिनांक 24, 25 व 26 दिसंबर को प्रातः 11 से दोपहर 2 बजे श्री गयाजी तर्पण निशुल्क होगा। जिसमें शहर के नागरिक हिस्सा ले सकते हैं।
महाराज श्री ने आगे कहा कि भागवत हमें सिखाती है कि जब अहंकार मिटता है, तब भक्ति जागृत होती है। जब भक्ति जागृत होती है, तब जीवन धन्य हो जाता है। वही धर्म श्रेष्ठ है जिससे भगवान में निष्काम भक्ति उत्पन्न हो। हम सब अपने मन को सांसारिक चिंताओं से मुक्त कर, कथा के अमृत में डुबो दें। यह कथा केवल सुनने की नहीं, जीने की वस्तु है। कथा 28 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक चलेगी।
अंतिम दिन 28 दिसंबर को विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन समिति के दिलीप रघुवंशी, सुरेश चौहान, राधेश्याम परमार, वीरेंद्र सिंह राठौड़, रविंद्र ठाकुर, नरेंद्र परमार, कैलाश परमार, मदनमोहन श्रीवास्तव आदि ने अधिक से अधिक धर्मप्रेमियों से कथा में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
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