नए लेबर लॉ के खिलाफ सडक़ों पर उतरे कर्मचारी, 10 से अधिक ट्रेड यूनियनों संयुक्त रूप से कामबंद हडताल कर किया प्रदर्शन

- बैंकिंग व परिवहन सेवाए हुई प्रभावित, मांगे नही मानी तो आगे भी होगा प्रदर्शन




भारत सागर न्यूज/देवास।
केंद्र सरकार की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के विरोध में 10 से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी को सिविल लाईन चौराहा स्थित एलआईसी क्रं. 2 पर कामबंद हडताल कर जमकर प्रदर्शन किया गया। 




इंटक प्रदेश मीडिया प्रभारी कैलाश वर्मा ने बताया कि दो घंटे से अधिक चली इस हडताल में आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एसईडब्ल्यूए, एआईसीसीटीयू, एपीएफ एवं यूटीयूसी सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों पदाधिकारी व कर्मचारियों ने संयुक्त मंच से इस हड़ताल में हिस्सा लेकर अपनी मांगे रखी व सरकार द्वारा जबरन लादे जा रहे चार नए श्रम कानूनों के विरोध में जमकर नारेबाजी की। 




प्रदर्शन में मुख्य रूप से पूर्व महापौर ठाकुर जयसिंह भी शामिल हुए, जिन्होंने हडताल का समर्थन किया व उपस्थित कर्मचारियों का मनोबल बडाते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियां श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात कर रही हैं और कार्यस्थल की सुरक्षा व अधिकारों को खतरे में डाल रही हैं। सरकार कर्मचारी विरोधी है। 




कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है। जबरन काला कानून को थोप कर कर्मचारियों का हनन कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार 36 प्रतिशत पर बनी है। सरकारों की हठधर्मिता के कारण कर्मचारी अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे है। समय आने पर सरकार को बताया जाएगा। प्रदर्शन को इंटक संगठन मंत्री लाखनसिंह ठाकुर, कैलाश वर्मा, दिलीप परमार, मकसूद पठान, शंकरलाल चौधरी, जेएस जाधव, पंजाबराव काले, बैंक एसोसिएशन मोहन जोशी, 




कैलाश सिंह राजपूत, बैंक एम्पलाई फेडरेशन क्षेत्रीय अध्यक्ष मोरसिंह राजपूत आदि ने भी संबोंधित किया। संगठनों की प्रमुख मांगें है कि चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द किए जाए। ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग। बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग। न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस ले। मनरेगा की बहाली करे। 




विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने आदि मांगे शामिल है। हडताल से बैंकिंग, बीमा व परिवहन सेवाओं पर असर देखने को मिला। यूनियनों का कहना है कि यदि समय रहते मांगे नही मानी गई तो आगामी दिनों में भारतबंद आंदोलन कर प्रदर्शन किया जाएगा। 

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