फर्जी बैंक ऑक्शन का खेल, 25 लोगों से करोड़ों की ठगी, पीड़ितों ने उठाई सीबीआई जांच की मांग
- प्रेसवार्ता कर पत्रकारों को दी जानकारी, फरार आरोपी, सहयोगियों पर आरोप और पुलिस पर शक,,,
भारत सागर न्यूज/देवास। आनंद देवकर द्वारा देवास में बैंक ऑक्शन की प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर हम लगभग 25 लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई। आरोपी ने फर्जी बैंक डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) एवं फर्जी बैंक सेल लेटर तैयार कर लोगों को झांसा देकर उनकी जीवनभर की जमा पूंजी हड़प ली।
उक्त मामले को लेकर पीड़ितों द्वारा मल्हार स्मृति मंदिर स्थित वरिष्ठ नागरिक संस्था सभागृह में पीड़ित पक्ष के फरियादियों द्वारा प्रेसवार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता में पीड़ितों ने बताया कि इस संबंध में हमारे द्वारा थाना सिविल लाइन, देवास में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपी आनंद देवकर लगभग 6 माह तक फरार रहा, जिसके बाद उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। पुलिस द्वारा उसे 13 दिनों के रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। पीड़ितों ने यह भी बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी ने हमारे सामने स्वीकार किया कि वह सभी फरियादियों को जानता है और उसने हमसे पैसे लिए हैं। उसने यह भी कहा कि यदि हम केस वापस ले लें तो वह हमारा पैसा लौटाने को तैयार है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपी ने स्वयं यह भी आरोप लगाते हुए बताया कि उसे जयेश पडियार, गौरव हरोड़े, धीरेंद्र दवे और सत्यम चौहान द्वारा छुपाकर रखा गया था। उसके रहने, खाने-पीने की पूरी व्यवस्था इन्हीं लोगों ने की। ठगी की रकम भी इन्हीं लोगों के पास सुरक्षित रखी गई है पुलिस जांच में इन चारों का आरोपी से संबंध पाया गया। वाहन नंबर के आधार पर टोल टैक्स के सीसीटीवी फुटेज में ये सभी देवास से रतलाम तक साथ में जाते हुए दिखाई दिए। कॉल रिकॉर्ड एवं अन्य तकनीकी साक्ष्य भी उपलब्ध थे। इन सभी सबूतों के बावजूद पुलिस ने चारों को थाने बुलाया।
उनके साथ कुछ राजनीतिक लोग भी पहुंचे। बातचीत के बाद आरोपियों ने हमें खुलेआम धमकी दी कि “तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते”। इसके बाद: पुलिस ने चार्जशीट से इन चारों के नाम हटा दिए। टोल फुटेज, कॉल रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी हटा दिए गए। पीड़ितों ने बताया कि आरोपी पक्ष द्वारा हमसे संपर्क कर केस वापस लेने का दबाव बनाया। 50 लाख रुपये और एक जमीन देने का प्रस्ताव दिया गया। शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने से मना किया गया। बाद में राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद ही रिपोर्ट दर्ज हुई। अन्य आरोपियों (रूपाली देवकर, अनिल नलगे, वैभव नलगे) से अब तक पूछताछ तक नहीं की गई। इस पूरे मामले की सीबीआई या एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन पुलिस अधिकारियों ने साक्ष्य हटाए, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। सभी आरोपियों को पुनः जांच में शामिल किया जाए। हमें हमारी मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाए। हम देश के चौथे स्तंभ (मीडिया) के माध्यम से प्रशासन, माननीय मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री जी से निवेदन करते हैं कि हमें न्याय दिलाया जाए और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।




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