अखंड आश्रम में 'महायुद्ध': धोखाधड़ी और साजिश के आरोपों के बीच आमने-सामने आए दो पक्ष, पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में...




भारत सागर न्यूज/संजय शर्मा/उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन के प्रसिद्ध अखंड आश्रम में यात्री निवास के अनुबंध को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक भीषण कानूनी और वैचारिक जंग का रूप ले चुका है। जहाँ एक ओर फरियादी पक्ष ने करोड़ों की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है, 




वहीं दूसरी ओर महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज ने इन आरोपों को आश्रम हड़पने की एक गहरी साजिश बताते हुए तीखा पलटवार किया है। इस पूरे प्रकरण में अब पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे मामला और अधिक पेचीदा हो गया है।




फरियादी पक्ष का आरोप: फर्जी अध्यक्ष बनकर किया करोड़ों का घोटाला

​फरियादी घनश्याम पटेल और उनके पुत्र सोहिल पटेल ने सीधे तौर पर शांति स्वरूपानंद पर आरोप लगाया है कि उन्होंने खुद को अखंड आश्रम ट्रस्ट का फर्जी अध्यक्ष बताते हुए यात्री निवास का अनुबंध किया और लाखों रुपए की जालसाजी की। उनके अनुसार, युगपुरुष स्वामी परमानंद ही ट्रस्ट के वास्तविक आजीवन अध्यक्ष हैं और शांति स्वरूपानंद कभी इस पद पर नहीं रहे। इसी आधार पर कोर्ट के आदेश के बाद महाकाल पुलिस ने शांति स्वरूपानंद, महावीर प्रसाद मानसिंगका, अशोक प्रजापत और दिवंगत एडवोकेट ओम प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ धारा 419 और 420 के तहत मामला दर्ज किया है।




​पटेल पक्ष ने महाकाल थाना पुलिस पर भी आरोपियों से साठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि एक साल से कोई कार्यवाही नहीं की गई, बल्कि थाना प्रभारी गगन बादल और जांच अधिकारी गौतम ने उनकी जमानत रोकने के लिए कोर्ट में उनके खिलाफ सात फर्जी मुकदमों की सूची पेश कर दी, जिसके विरुद्ध अब कोर्ट में परिवाद पेश किया गया है।




शांति स्वरूपानंद का पलटवार: आश्रम पर कब्जे के लिए रचा गया षडयंत्र

​इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज ने इसे अपनी छवि धूमिल करने और आश्रम पर कब्जा करने का प्रयास बताया है। महाराज का आरोप है कि घनश्याम पटेल और उनके सहयोगी चाहते हैं कि वे कार्यकारिणी अध्यक्ष पद से हट जाएं ताकि आश्रम की संपत्ति पर कब्जा किया जा सके। उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा कि पिछले 40 वर्षों से वे आश्रम में हैं और आज तक उनके आचरण पर कोई दाग नहीं लगा है।




​महाराज ने गुरु की हत्या की साजिश रचने जैसे आरोपों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी घृणित सोच केवल वही व्यक्ति रख सकता है जिसका स्तर बेहद गिर चुका हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु उनकी संस्कृति में सदैव पूजनीय रहे हैं और रहेंगे।




साजिश और काउंटर एफआईआर का जाल -

​विवाद केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहा है। घनश्याम पटेल का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें फंसाने के लिए शाजापुर में हनीट्रैप की झूठी कहानी रची, जिसकी जांच में क्राइम ब्रांच ने मानसिंगका के परिजनों को ही दोषी पाया है। वहीं, पटेल ने वाराणसी के लक्सा थाने में भी अज्ञात लोगों के खिलाफ उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर उगाही करने का मामला दर्ज कराया है।

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