फर्जी दस्तावेजों से अनुकम्पा नौकरी हड़पने का आरोप: छोटी बहन ने खोली पोल, जांच की मांग...
सरकारी नियमों के अनुसार, अनुकम्पा नियुक्ति का पहला हक उसी आश्रित को होता है जो नाबालिग, अविवाहित और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य हो। परिवार में चार बहनें थीं—तीन का विवाह मां के निधन से पहले ही हो चुका था और वे ससुराल चली गईं। नेहा उस समय नाबालिग और अविवाहित थी, इसलिए वह आवेदन के योग्य थी, लेकिन उम्र की सीमा के कारण आवेदन नहीं कर सकी। नेहा के आरोपों के अनुसार, बड़ी बहन प्रियंका चौहान ने सुनियोजित साजिश रची।
उसने शपथ पत्र में नेहा को खुद से बड़ी बहन बताकर गुमराह किया, बहनों के नाम-पते गलत लिखे और फर्जी हस्ताक्षरों से सहमति पत्र तैयार कराए। सबसे शर्मनाक बात, प्रियंका का विवाह पहले ही हो चुका था, फिर भी उसने फर्जी तलाकनामा पेश कर खुद को पात्र सिद्ध किया। नेहा ने दावा किया कि पिता की मानसिक स्थिति कमजोर होने का फायदा उठाकर उनके नाम से भी नकली सहमति पत्र बनवाया गया। नौकरी हासिल करने के बाद प्रियंका ने परिवार की कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई—न पिता की देखभाल की, न छोटी बहनों का सहारा बनी।
वहीं, नेहा ने वर्षों तक पिता की सेवा की और घर संभाला हाल ही में पिता के निधन के बाद दस्तावेजों की जांच में सारा फर्जीवाड़ा सामने आया। नेहा ने पाया कि प्रियंका ने महात्मा गांधी चिकित्सालय में स्टाफ नर्स की नौकरी के लिए जो फाइल बनाई, उसमें मूल प्रमाण-पत्र जाली हैं। नेहा का कहना है, "यह न केवल मेरा हक छीनने का अपराध है, बल्कि सरकारी खजाने पर बोझ भी। ऐसी नियुक्तियां स्वास्थ्य सेवा को कमजोर करती हैं।
यह मामला देवास स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाता है। क्या दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई? अनुकम्पा नियमों का दुरुपयोग कितना आम है? नेहा ने मांग की है कि प्रियंका की नियुक्ति तत्काल निरस्त हो, फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच हो और दोषी पर कानूनी कार्रवाई की जाए। जिला प्रशासन ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह खबर तहलका मचा रही है। यदि जांच हुई तो कई अन्य अनुकम्पा मामलों पर भी रोशनी पड़ सकती है। नेहा का न्याय मिलेगा या फर्जीवाड़ा बचा रहेगा—यह समय बताएगा।






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