सतलोक आश्रम बैतूल में हो रहा विश्व शांति के लिए महा-धार्मिक अनुष्ठान का कार्यक्रम,उमड़े लाखों श्रद्धालु

- विश्व के शुभचिंतक संत रामपाल महाराज ने दिया विश्व शांति, मानवता और समाज सुधार का संदेश,,

- विश्व शांति महा-धार्मिक अनुष्ठान में हुआ 51 जोड़ों का दहेज मुक्त विवाह, लगाया गया विशाल रक्तदान शिविर,,,




भारत सागर न्यूज/बैतूल।
विश्व में शांति के लिए व आपसी भाईचारे के लिए विश्व के शुभचिंतक संत रामपाल महाराज के सानिध्य में चल रहे तीन दिवसीय महा-धार्मिक अनुष्ठान का आज दूसरा दिन था। आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और टकराव का माहौल देखने को मिल रहा है, विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों के बीच बढ़ता तनाव अत्याधुनिक परमाणु हथियारों की होड़ और स्वार्थ की राजनीति ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है ऐसे अशांत समय में समाज को एकजुट करने और सकारात्मक दिशा देने की पहल भारत से हो रही है। 




जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज के पावन सान्निध्य में “विश्व शांति महा-धार्मिक अनुष्ठान” का आयोजन किया गया है, सतलोक आश्रम बैतूल में इस महा समागम के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विश्व शांति के आह्वान में सहयोग दे रहे हैं। विश्व में शांति व भारत को विश्व गुरु बनाने के उद्देश्य से सतलोक आश्रम बैतूल सहित सभी 13 सतलोक आश्रमों में अखंड पाठ व विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस महासमागम में तीनों दिन आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज द्वारा लिखित सद्ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ किया जा रहा है जिसका प्रारंभ 1 मई को हो चुका है। वहीं समागम का दूसरा दिन यानी 2 मई विशेष रूप से मानव सेवा और समाज सुधार को समर्पित रहा, जिसमें कई प्रेरणादायक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।




आज जब समाज दहेज, स्वार्थ और मानवता से दूर होती सोच जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे समय में विश्व के शुभचिंतक कहे जाने वाले संत रामपाल महाराज द्वारा चलाया जा रहा "दहेज मुक्त भारत अभियान" समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। इस अभियान के तहत 51 जोड़ों का दहेज मुक्त विवाह बड़ी ही सादगीपूर्ण तरीके से मात्र 17 मिनिट में संपन्न कराया गया। 




2 मई को आयोजित होने वाले विशाल रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में संत रामपाल महाराज के अनुयायीयों ने भाग लेकर जरूरतमंदों के जीवन बचाने के इस पुण्य कार्य में अपना योगदान दिया। रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि एक यूनिट रक्त किसी व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। यह शिविर समाज में मानवता, सहयोग और सेवा भावना को मजबूत करने का संदेश दे रहा है, अनुयायियों द्वारा जिला चिकित्सालय बैतूल से आई टीम को 282 यूनिट रक्तदान दिया गया।




इसके साथ ही देहदान शिविर भी इस महासमागम का एक प्रमुख आकर्षण रहा। जहाँ अधिकांश लोग मृत्यु के बाद शरीर को केवल अंतिम संस्कार तक सीमित मानते हैं, वहीं देहदान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और जरूरतमंद मरीजों के लिए नई संभावनाएँ खुलती हैं। संत रामपाल महाराज के अनुयायी संत की शिक्षाओं से प्रेरित होकर मानव सेवा को सर्वोपरि मानते हुए इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं, प्राप्त जानकारी तक 3487 लोगो ने देहदान के संकल्प फार्म भरें। यह पहल समाज को यह संदेश देगी कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए भी होना चाहिए। 




समागम में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बन चुके दहेज मुक्त विवाह, जो संत रामपाल महाराज के सानिध्य में गुरु वाणी “असुर निकंदन रमैणी” द्वारा मात्र 17 मिनट में संपन्न कराए जाते है। आज दहेज प्रथा के कारण न जाने कितने परिवार आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में बिना किसी लेन-देन, आडंबर और फिजूलखर्ची के हुए विवाहों ने समाज के सामने सादगी और समानता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।




मानवता, सेवा, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिकता का यह अद्भुत संगम निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई प्रेरणा दे रहा है। सृष्टि की रचना कैसे हुई इस जटिल सवाल का उत्तर प्रदर्शनी के माध्यम से दिया जा रहा है,जिसे देखकर व शास्त्रों में प्रमाणित पाकर 2 दिनों में 4520 लोगों ने संत रामपाल महाराज से निःशुल्क नामदीक्षा ग्रहण कर अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की। 




इस महासमागम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध देशी घी से बने मोहक भोजन भंडारे की व्यवस्था की गई है जिसमें सब्जी,पुड़ी,दाल,चावल,फुल्का, बूंदी प्रसाद का भंडारा चल रहा है। इस महा-धार्मिक अनुष्ठान का कल समापन है। सभी धर्म प्रेमी जनता इस समागम में पहुंचकर अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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