महाकाल लोक की भव्यता के बीच बदहाल व्यवस्था, दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का संघर्ष
भारत सागर न्यूज/उज्जैन/संजय शर्मा । धर्मनगरी उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, लेकिन मंदिर प्रशासन की लचर व्यवस्था ने बाबा के भक्तों की राह मुश्किल कर दी है। विशेषकर गेट नंबर 01 यानी पालकी द्वार पर शीघ्र दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी भीड़ और अव्यवस्था से दो-चार होना पड़ रहा है।
यहां संकरी गली में जूता स्टैंड की स्थिति और बेतरतीब भीड़ के कारण भगदड़ जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। मंदिर प्रशासन ने भले ही बैरिकेडिंग कर रखी है, लेकिन गेट के बाहर फूल-प्रसादी और फुटकर विक्रेताओं का अवैध जमावड़ा मुख्य मार्ग को संकरा बना रहा है।
महाकाल घाटी से लेकर गेट तक पसरे इन अतिक्रमणों के कारण आम श्रद्धालुओं का चलना दूभर हो गया है। मंदिर प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता के चलते यह मार्ग सुगम होने के बजाय अवरोधों से भरा हुआ है। यदि समय रहते इस मार्ग को खाली नहीं कराया गया, तो सावन के आगामी महीनों में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के बीच स्थिति और भी भयावह हो सकती है। प्रशासन की ओर से सुगम दर्शन के दावों की हवा इस बदइंतजामी के कारण निकलती दिख रही है।
व्यवस्था का दूसरा कड़वा सच बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर की भारी कमी है। गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों का यह कहना कि महज कुछ ही व्हीलचेयर उपलब्ध हैं, मंदिर समिति की लचर तैयारियों की पोल खोलता है। दर्शन के लिए आए वरिष्ठ नागरिक और उनके परिजन घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। बाबा की भक्ति में लीन होकर आने वाले वृद्धों को जब घंटों तक व्हीलचेयर के लिए भटकना पड़ता है, तो उनकी सारी आस्था और सुविधा के दावे एक पल में धराशायी हो जाते हैं।
आगामी सावन मास में जब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी, तब ये अव्यवस्थाएं किसी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे सकती हैं। यदि मंदिर समिति ने अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए, तो लाखों भक्तों के लिए बाबा महाकाल के दर्शन करना किसी कठिन अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। प्रशासन को चाहिए कि फुटकर व्यापारियों को अन्यत्र व्यवस्थित करे, व्हीलचेयर की संख्या बढ़ाए और मार्ग को सुगम बनाए ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के बाबा के दीदार कर सकें।





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