उज्जैन में जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव: 16 जुलाई को स्थानीय अवकाश की मांग, मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजा आग्रह



भारत सागर न्यूज/उज्जैन/ संजय शर्मा । उज्जैन के इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा इस बार ऐतिहासिक होने जा रही है। 16 जुलाई से 24 जुलाई तक चलने वाले इस महोत्सव की तैयारियों के बीच इस्कॉन मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव से विशेष आग्रह किया गया है कि रथयात्रा वाले दिन यानी 16 जुलाई को उज्जैन में स्थानीय अवकाश घोषित किया जाए। राघव पंडित दास के अनुसार, जगन्नाथ पुरी सहित देश के प्रमुख शहरों और विदेशों में भी जहाँ रथयात्रा निकलती है, वहां उस दिन स्थानीय अवकाश की परंपरा है।



​पीआरओ राघव पंडित दास ने उज्जैन के विशेष धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उज्जैन का जगन्नाथ संस्कृति से गहरा नाता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न मालवा के उज्जैन के ही राजा थे और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उन्हें स्वप्न में भगवान ने आदेश दिया था कि 'नील माधव' की मूर्ति समुद्र किनारे स्थित है, जिसके बाद उन्होंने वहां मंदिर का निर्माण करवाया था। 




इसी स्थान पर आज प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी मंदिर स्थित है, जहां राजा इंद्रद्युम्न ने ही सबसे पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ (लकड़ी) मूर्तियां स्थापित की थीं। इसी नाते उज्जैन का इस रथयात्रा महोत्सव से सीधा और आध्यात्मिक संबंध है।





​यह रथयात्रा 16 जुलाई को प्रातः 11 बजे इंदिरा नगर चौराहा से आरंभ होकर शाम 6:30 बजे देवास रोड स्थित महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ पहुंचेगी। महोत्सव में भागवत कथा, छप्पन भोग, नाट्य प्रस्तुतियाँ और प्रतिदिन प्रसाद वितरण जैसे कई आयोजन होंगे। 24 जुलाई को वापसी रथयात्रा के साथ इस भव्य उत्सव का समापन होगा। इस्कॉन प्रबंधन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक रथयात्रा में भारी संख्या में सम्मिलित होकर धर्म लाभ उठाएं।

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