सिंहस्थ 2028 की तैयारी: उज्जैन में संतों का शक्ति प्रदर्शन, पुनर्गठित अखाड़ा परिषद ने फूंका एकता का बिगुल





भारत सागर न्यूज/ उज्जैन।की धर्मधरा पर 2028 में होने वाले महाकुंभ सिंहस्थ के लिए अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में संतों की सर्वोच्च संस्था मानी जाने वाली उज्जैन स्थानीय अखाड़ा परिषद का सात महीने बाद फिर से उदय हुआ है। निरंजनी अखाड़े के परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शैव, वैष्णव, नाथ और उदासीन सहित सभी संप्रदायों के संत महंत एक मंच पर नजर आए। इस बैठक ने न केवल परिषद के पुनर्गठन को गति दी है बल्कि आने वाले सिंहस्थ के लिए अखाड़ों की एकजुटता का बड़ा संदेश भी दे दिया है।





अखाड़ा परिषद के फिर से सक्रिय होने के निर्णय पर मुहर लगाते हुए संतों ने अब प्रशासन के साथ सीधे समन्वय बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी और निर्मोही अखाड़े के मदन मोहन दास सहित तमाम दिग्गज संतों की मौजूदगी ने इस आयोजन की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है। बैठक में विशेष रूप से उज्जैन और नासिक कुंभ से जुड़ी तैयारियों और शासन-प्रशासन के साथ होने वाले संवाद पर लंबी चर्चा हुई। संतों का स्पष्ट मानना है कि यदि सिंहस्थ को दिव्य और भव्य बनाना है तो अखाड़ों का एक मत होना अनिवार्य है।





स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वर दास ने इस पुनर्गठन को लेकर उत्साह जताते हुए साफ किया कि परिषद अब पूरी तरह से पुनर्जीवित हो चुकी है और पूर्व के सभी पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पहले की तरह ही करेंगे। संतों ने संकल्प लिया है कि आने वाले समय में वे शासन और प्रशासन को सिंहस्थ से जुड़े आवश्यक सुझाव सामूहिक रूप से देंगे। उनका मुख्य उद्देश्य संत समाज में समन्वय स्थापित कर 2028 के आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। इस नई शुरुआत के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन के साथ संतों की बातचीत में एक नया तालमेल देखने को मिलेगा, जो सिंहस्थ की तैयारियों में मील का पत्थर साबित हो सकता है।



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