महाकाल की हर सवारी का बदलेगा अंदाज: सावन-भादौ में दिखेंगे अनूठे रंग, इस बार तय हुई खास थीम
भारत सागर न्यूज/उज्जैन /संजय शर्मा । इस साल भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली सवारियां केवल आस्था का केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि हर सोमवार इनके जरिए समाज को संस्कृति, पर्यावरण और जनजागरूकता का एक नया संदेश दिया जाएगा। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 की सभी छह सवारियों के लिए अलग-अलग भव्य थीम तय की हैं, ताकि बाबा के दरबार में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर बार कुछ नया और दिव्य देखने को मिले। इन तमाम व्यवस्थाओं और सुचारु संचालन के लिए मंदिर प्रशासन ने पहले ही प्रभारी और सहायक अधिकारियों की तैनाती कर दी है।
मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक के अनुसार, इस बार महाकाल की हर सवारी को एक अनूठी पहचान दी जाएगी। खास बात यह है कि इस धार्मिक अनुष्ठान में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले पारंपरिक जनजातीय नृत्य दल अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां देकर चार चांद लगाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को निकलने वाली प्रथम सवारी 'वैदिक उद्बोधन' पर आधारित होगी, जबकि 10 अगस्त को दूसरी सवारी में 'विभिन्न लोक नृत्य' की धूम रहेगी। इसके बाद 17 अगस्त को तीसरी सवारी में पुलिस, सेना, होमगार्ड, स्कूल और निजी बैंड अपनी धुनों से समां बांधेंगे, वहीं 24 अगस्त को चौथी सवारी के जरिए 'पर्यावरण संरक्षण का संदेश' जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
सावन के अंतिम दौर और भादौ मास में सवारियों का यह कारवां और भी ज्यादा भव्य हो जाएगा। 31 अगस्त को पांचवीं सवारी के दौरान '84 महादेव की झांकी' सजाई जाएगी, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। अंत में 7 सितंबर को निकलने वाली महाकाल की अंतिम और सबसे बड़ी 'राजसी सवारी' होगी, जिसमें आगामी 'सिंहस्थ महापर्व-2028 की भव्य झांकी' सजाई जाएगी और आसमान से ड्रोन के जरिए फूलों की वर्षा की जाएगी। मंदिर समिति के इस अनूठे प्रयास का मकसद धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ना है, जिससे महाकाल की नगरी आने वाले हर श्रद्धालु के लिए यह महापर्व हमेशा के लिए यादगार बन सके।



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