गुप्त नवरात्रि आत्मशुद्धि, साधना और देवी उपासना का महापर्व- पं. संदीप शास्त्री



भारत सागर न्यूज/देवास। 15 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक आषाढ़ मास की पावन गुप्त नवरात्रि मनाई जाएगी। इस अवसर पर सनातन ज्योतिष व अनुष्ठान केंद्र के पं. संदीप शास्त्री ने प्रदेशवासियों एवं श्रद्धालुओं को गुप्त नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मबल, संयम, साधना एवं ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का महापर्व है। पं. संदीप शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तंत्र, मंत्र, देवी उपासना एवं आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 









इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दशमहाविद्याओं की साधना का भी विशेष महत्व है। श्रद्धा, संयम एवं सात्त्विक भाव से की गई उपासना से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल माँ भगवती के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा दुर्गा सप्तशती, श्रीसूक्त, दुर्गा कवच अथवा अपने इष्ट मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। साधना के दौरान सात्त्विक आहार, संयम, सत्य एवं सदाचार का पालन विशेष फलदायी माना गया है।




 पं. शास्त्री के अनुसार गृह क्लेश एवं पारिवारिक अशांति की शांति के लिए माँ दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित कर "ॐ दुं दुर्गायै नमः" मंत्र का जप करना तथा परिवार सहित दुर्गा चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है। वहीं ऋण मुक्ति एवं आर्थिक उन्नति के लिए श्रीसूक्त का पाठ, माँ महालक्ष्मी की आराधना और सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि न्यायालय से जुड़े मामलों में शुभ परिणाम की कामना रखने वाले श्रद्धालु दुर्गा कवच का नियमित पाठ करें तथा सत्य, धैर्य और न्यायपूर्ण आचरण बनाए रखें। धन, वैभव एवं समृद्धि के लिए माँ महालक्ष्मी और माँ दुर्गा की संयुक्त आराधना, श्रीसूक्त का पाठ, दीपदान एवं दान-पुण्य विशेष लाभकारी माना गया है।







वहीं शीघ्र विवाह एवं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की इच्छा रखने वाले युवक-युवतियों को माँ कात्यायनी की उपासना करते हुए "ॐ कात्यायन्यै नमः" मंत्र का नियमित जप करने का सुझाव दिया गया है। अंत में पं. शास्त्री ने कहा कि श्रद्धा, विश्वास और सद्कर्म के साथ की गई माँ आदिशक्ति जगदम्बा की आराधना जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने माँ भगवती से सभी श्रद्धालुओं के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

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