रिंग रोड स्थित प्रस्तावित भूमि पर न बने केन्द्रीय विद्यालय, बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता स्वीकार नहीं: पूर्व विधायक गुर्जर
भारत सागर न्यूज/नागदा । मुख्यमंत्री मोहन यादव के 10 जुलाई को नागदा आगमन पर पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने नागदा केन्द्रीय विद्यालय के स्थायी भवन हेतु रिंग रोड दुर्गापुरा की चयनित भूमि पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि विद्यालय जैसी संवेदनशील शैक्षणिक संस्था का निर्माण ऐसे स्थान पर नहीं किया जाना चाहिए, जहां औद्योगिक प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। मुख्यमंत्री, सांसद और केन्द्रीय मंत्री से अनुरोध किया है कि प्रस्तावित भूमि का पुनर्मूल्यांकन कर विद्यार्थियों के हित में वैकल्पिक एवं सुरक्षित स्थान का चयन कराया जाए।
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि रिंग रोड के समीप प्रस्तावित भूमि नागदा औद्योगिक क्षेत्र के प्रभाव वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों एवं वायु प्रदूषण का प्रभाव सबसे अधिक रहता है। यदि यहां केन्द्रीय विद्यालय का स्थायी भवन बनाया जाता है तो प्रतिदिन सैकड़ों विद्यार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहेंगे, जिसका उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडेगा।
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। यदि विद्यालय का स्थान ही प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में होगा तो यह उद्देश्य प्रारंभ से ही प्रभावित हो जाएगा।
केन्द्रीय विद्यालय भवन चयन के मानकों का पालन आवश्यक
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थायी विद्यालय भवन के लिए भूमि चयन करते समय केवल भूमि की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं का परीक्षण किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से विद्यालय का स्थान सुरक्षित एवं प्रदूषणमुक्त वातावरण में हो। औद्योगिक इकाइयों, रासायनिक कारखानों, खतरनाक गैसों अथवा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों से पर्याप्त दूरी हो। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की व्यवस्था उपलब्ध हो। अत्यधिक शोर और पर्यावरणीय जोखिम, जलभराव, धुल वाले क्षेत्र में नहीं हो। भविष्य में विद्यालय के विस्तार, खेल मैदान एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि पूर्व में चम्बल नदी के किनारे बाल हनुमान मंदिर के पास की जमीन का भी चयन किया गया था परंतु आपत्ति लेने पर उसे निरस्त किया गया था जबकि मेरे द्वारा विधायक कार्यकाल में स्वयं पहल करके गिदगढ-भीमपुरा में नवीन जिला मार्ग पर 40 बीघा जमीन उपलब्ध कराने की पहल की गई थी पंचायत द्वारा भी लिखित में पत्र दिया गया था परंतु उसे राजनैतिक दृष्टिकोण से महत्व नही दिया गया।
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि यदि इन मानकों का समुचित परीक्षण किए बिना केवल उपलब्ध भूमि के आधार पर विद्यालय भवन बनाया जाता है तो भविष्य में विद्यार्थियों और शिक्षकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
शिक्षकों के स्थानांतरण बढ़ने की आशंका
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि यदि विद्यालय लगातार प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में संचालित होगा तो वहां पदस्थ शिक्षक एवं कर्मचारी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अन्य स्थानों पर स्थानांतरण का प्रयास करेंगे। इससे विद्यालय में अनुभवी शिक्षकों की निरंतर उपलब्धता प्रभावित होगी और इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों से कराई जाए पर्यावरणीय जांच
पूर्व विधायक गुर्जर ने मांग की कि प्रस्तावित भूमि पर निर्माण प्रारंभ करने से पहले वायु गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य जोखिम तथा औद्योगिक सुरक्षा का स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थान से विस्तृत परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में यह पाया जाता है कि क्षेत्र प्रदूषण या औद्योगिक जोखिम से प्रभावित है, तो तत्काल अन्य उपयुक्त भूमि का चयन किया जाए।
पूर्व विधायक गुर्जर ने कहा कि केन्द्रीय विद्यालय केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों तक क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य तय करेगा। इसलिए भूमि चयन में भूमिपूजन की जल्दबाजी या केवल प्रशासनिक सुविधा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी तकनीकी, पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों का पालन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।




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